Himachal: नीट पेपर लीक मामले पर शिमला में गरमाई सियासत मुख्यमंत्री सुक्खू ने मंत्रियों संग लोकभवन के बाहर दिया धरना

शिमला, 22 जुलाई: नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन की गूंज अब हिमाचल प्रदेश में भी तेज हो गई है। मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उनके कैबिनेट मंत्रियों ने शिमला स्थित लोकभवन के बाहर जमीन पर बैठकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित यह प्रदर्शन दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और नीट परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में किया गया। इस दौरान पूरा शिमला परिसर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और केंद्र सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा।


छात्रों के समर्थन में उतरे मुख्यमंत्री सुक्खू
धरने के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार के रवैये को अड़ियल करार देते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह स्वयं छात्र राजनीति की उपज हैं और विद्यार्थियों की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांग जायज थी। उन्होंने सवाल उठाया कि पेपर लीक के तनाव के कारण जिन 20 छात्रों ने आत्महत्या की है, उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने मांग की कि आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियां (FIR) तुरंत वापस ली जानी चाहिए।


राहुल और प्रियंका गांधी की हिरासत पर जताई आपत्ति
मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों ने नई दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ किए गए व्यवहार और उन्हें हिरासत में लिए जाने का कड़ा विरोध किया। सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाना तानाशाही की निशानी है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी युवाओं की आवाज उठा रहे थे, उन्हें रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के बिना लोकतंत्र अधूरा है और सरकार को दमनकारी नीतियों के बजाय युवाओं से संवाद स्थापित कर गतिरोध को खत्म करना चाहिए।


भाजपा सरकारों में पेपर लीक को बताया आम बात
विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में पेपर लीक होना एक सामान्य बात बन गई है। उन्होंने याद दिलाया कि जब हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, तब भी प्रदेश में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। मुख्यमंत्री के साथ इस धरने में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी सहित पूरी कैबिनेट शामिल रही। नेताओं ने सोनम वांगचुक पर बनाए गए मामलों को भी तुरंत वापस लेने की मांग उठाई।


मंत्रियों और विधायकों ने दी दिल्ली कूच की चेतावनी
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह स्वयं दिल्ली जाकर नीट पेपर लीक के खिलाफ हो रहे आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने युवाओं पर लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंट रही है। उन्होंने कहा कि करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर है और सरकार समाधान निकालने के बजाय पुलिस के बल पर आवाज दबा रही है। इस धरने में स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार और महापौर संजय चौहान भी मौजूद रहे।


भारी बारिश के बीच राहत कार्यों की जानकारी
धरने से पूर्व मीडिया से बातचीत में जगत सिंह नेगी ने प्रदेश की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में बीते दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर भूस्खलन और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की घटनाएं हुई हैं, जिससे संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। नेगी ने आश्वासन दिया कि बंद सड़कों को बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है और जल्द ही यातायात सामान्य कर दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मौका मिलने पर वह दिल्ली में उनके समर्थन में खड़े होंगे।

 

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