चंडीगढ़, 21 जुलाई। पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर दिल्ली के इंदिरा भवन में होने वाली कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक को अचानक स्थगित कर दिया गया है। यह बैठक मंगलवार शाम छह बजे प्रदेश कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की अध्यक्षता में होनी निर्धारित थी। दिल्ली में नीट मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे उग्र प्रदर्शन और उसके बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों के कारण पार्टी नेतृत्व को यह फैसला लेना पड़ा। इस बैठक में पंजाब की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर गहन मंथन होना था, लेकिन राजधानी में मचे हंगामे ने पूरी योजना पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
प्रमुख नेताओं की हिरासत बनी स्थगन का कारण
बैठक टलने का सबसे बड़ा कारण पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की दिल्ली पुलिस द्वारा की गई हिरासत है। मंगलवार को नीट पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राहुल गांधी सहित पंजाब कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को हिरासत में ले लिया। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी, तथा कोर कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल थे। चुनावी रणनीति बनाने के लिए इन नेताओं की मौजूदगी अनिवार्य थी, लेकिन इनके हिरासत में होने के कारण बैठक का आयोजन संभव नहीं हो सका।
चन्नी और वड़िंग की एकजुटता पर टिकी थी नजरें
राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर काफी उत्सुकता थी, क्योंकि चुनावी समितियों की घोषणा के बाद पहली बार चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग एक साथ बैठने वाले थे। समितियों के गठन के समय चन्नी समर्थक गुट ने राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर बनाए रखने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। हालांकि, पार्टी हाईकमान के कड़े रुख के बाद आंतरिक कलह कुछ हद तक शांत हुई है। इस बैठक के माध्यम से पार्टी यह संदेश देना चाहती थी कि पंजाब कांग्रेस के सभी गुट आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एकजुट होकर काम करने को तैयार हैं।
बैठक में शामिल होने थे 21 वरिष्ठ नेता
पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए गठित विभिन्न समितियों के अध्यक्षों और करीब 21 वरिष्ठ नेताओं को इस चर्चा में शामिल होने के लिए दिल्ली बुलाया गया था। सूत्रों के अनुसार, पंजाब से लगभग सभी आमंत्रित नेता दिल्ली पहुंच चुके थे और बैठक की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। इन समितियों का मुख्य कार्य चुनाव प्रबंधन, प्रचार प्रसार और ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूत करना है। बैठक स्थगित होने से इन समितियों के शुरुआती कार्यों और चुनावी रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया में अब कुछ और दिनों का विलंब हो गया है।
अगली तारीख पर सस्पेंस और आगामी रणनीति
अब सभी की नजरें बैठक की नई तारीख पर टिकी हुई हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार दोपहर बाद दिल्ली के हालातों की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल बैठक की नई तिथि की घोषणा करेंगे। नई बैठक में न केवल चुनाव प्रबंधन और संगठनात्मक समन्वय पर चर्चा होगी, बल्कि पंजाब की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और सरकार के खिलाफ मुद्दों के चयन पर भी अंतिम मुहर लगाई जाएगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी जल्द से जल्द इस बैठक को आयोजित करना चाहती है ताकि चुनावी तैयारियों में किसी भी तरह की ढील न रहे।
पंजाब में सियासी सरगर्मी तेज
दिल्ली में बैठक टलने और नेताओं की हिरासत की खबर के बाद पंजाब में भी राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस कार्यकर्ता अपने नेताओं की हिरासत का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव के लिए समितियों की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। पंजाब के स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ अब केंद्रीय मुद्दों पर भी कांग्रेस अपनी आक्रामकता बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में जब भी यह बैठक होगी, उसमें पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन और जिला स्तर पर शक्ति प्रदर्शन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। फिलहाल पंजाब कांग्रेस के तमाम नेता दिल्ली में ही अगले निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।
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