पेरिस, 22 जुलाई। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फ्रांस ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कानून पारित किया है। इसके साथ ही फ्रांस यूरोपीय संघ का ऐसा पहला देश बन गया है जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मंजूरी दी है। यह कानून बच्चों को इंटरनेट की दुनिया के दुष्प्रभावों और अत्यधिक डिजिटल सक्रियता से बचाने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का पुरजोर समर्थन प्राप्त है।
विधायिका की मंजूरी और सरकार का पक्ष
फ्रांसीसी सीनेट और नेशनल असेंबली में इस विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद इसे भारी बहुमत से पारित कर दिया गया। नेशनल असेंबली में मतदान के दौरान इस कानून के पक्ष में 279 और विरोध में केवल 81 वोट पड़े। इमैनुएल मैक्रों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए एक वीडियो संदेश में कहा कि बच्चों और किशोरों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में फ्रांस अब पूरे यूरोप का नेतृत्व कर रहा है। सरकार की मंशा इस कानून को 1 सितंबर से प्रभावी बनाने की है, ताकि नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही बच्चों को इस सुरक्षा घेरे में लाया जा सके।
कानून के मुख्य प्रावधान और कंपनियों की जिम्मेदारी
इस नए कानून के लागू होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने यूजर्स की सही उम्र की पुष्टि करें। 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे नए सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना पाएंगे। इसके अलावा, जो बच्चे पहले से ही इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके अकाउंट जनवरी 2027 तक बंद करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। डिजिटल मंत्री ऐनी ले हेनानफ ने स्पष्ट किया है कि उम्र सत्यापन की तकनीक वर्तमान में उपलब्ध है और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से सोशल मीडिया कंपनियों की होगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में यूजर्स का निजी डेटा पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।
शिक्षा को छूट और दंड का स्वरूप
सरकार ने इस कानून को बेहद संतुलित रखने का प्रयास किया है। यही कारण है कि शिक्षा से जुड़ी वेबसाइटों, ऑनलाइन विश्वकोश और वैज्ञानिक सूचनाएं साझा करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को इस प्रतिबंध से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई और शोध कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस कानून के तहत नियमों के उल्लंघन पर बच्चों या उनके माता-पिता के लिए किसी प्रकार की सजा या जुर्माने का प्रावधान नहीं किया गया है। सारी कानूनी जवाबदेही और जिम्मेदारी सोशल मीडिया कंपनियों पर ही डाली गई है।
प्रतिबंध की आवश्यकता और खतरनाक आंकड़े
फ्रांस सरकार ने यह कठोर कदम जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनियों के बाद उठाया है। फ्रांस की पब्लिक हेल्थ वॉचडॉग की रिपोर्ट के अनुसार, टिकटॉक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स किशोरों, विशेषकर लड़कियों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 12 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 90 प्रतिशत बच्चे रोजाना स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से हर दूसरा किशोर दिन भर में औसतन दो से पांच घंटे केवल सोशल मीडिया पर ही बिताता है, जो उनके समग्र विकास के लिए चिंताजनक माना जा रहा है। इसी डिजिटल लत को तोड़ने के लिए फ्रांस ने यह साहसी कदम उठाया है।
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