नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राज्यसभा में उनका छह वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है और पार्टी ने उन्हें संसद के ऊपरी सदन के लिए दोबारा नामांकित नहीं किया। उच्च सदन की सदस्यता न रहने के कारण उन्हें संवैधानिक नियमों के तहत मंत्रिमंडल से हटना पड़ा है।
राष्ट्रपति भवन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत पूरी की गई है। कुरियन का इस्तीफा उसी स्थिति में आया है जब पार्टी ने उन्हें फिर से सदन में भेजने के बजाय नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया।
केरल में बीजेपी का प्रमुख चेहरा
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन केरल के कोट्टायम से ताल्लुक रखते हैं और लंबे समय से दक्षिण भारत में बीजेपी के संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे हैं। पेशे से वकील कुरियन न केवल सांगठनिक कार्यों में सक्रिय रहे, बल्कि वे टेलीविजन बहसों में भी पार्टी का मजबूती से पक्ष रखते रहे हैं। उनके पास भाषाई कौशल भी है, यही कारण था कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान वे अक्सर उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते हुए नजर आते थे।
ईसाई समुदाय तक पहुंच बनाने की रणनीति
साल 2024 में जब मोदी कैबिनेट का विस्तार हुआ, तब जॉर्ज कुरियन को मंत्री बनाया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम को केरल के ईसाई समुदाय के बीच बीजेपी की पैठ बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा था। कुरियन स्वयं सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े हैं, जो केरल के सबसे प्रभावशाली चर्चों में से एक माना जाता है। बीजेपी ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर यह संदेश देने का प्रयास किया था कि पार्टी सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक सफर और अनुभव
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पुराने निष्ठावान: 1980 में बीजेपी की स्थापना के समय से ही पार्टी के सक्रिय सदस्य।
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संगठनात्मक पद: केरल बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष, महासचिव और भारतीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं।
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प्रशासनिक अनुभव: अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री ओ. राजगोपाल के ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) के रूप में कार्य किया।
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चुनावी मुकाबला: 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में पुथुपल्ली सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
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संसदीय क्षेत्र: वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे।
दोबारा नामांकन न मिलने से बढ़ी चर्चा
जॉर्ज कुरियन का मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की याद दिलाता है, जिन्हें भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने पर इसी तरह पद छोड़ना पड़ा था। कुरियन मध्य प्रदेश से सांसद थे, लेकिन इस बार बीजेपी ने उस राज्य से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो केरल के हालिया चुनावी नतीजों और आगामी सांगठनिक फेरबदल को देखते हुए नेतृत्व ने यह निर्णय लिया है।
अचानक आए इस फैसले ने कई लोगों को हैरान कर दिया है, क्योंकि 4 जून को जब उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक हुई, तो उसमें कुरियन का नाम शामिल नहीं था। हालांकि, कुरियन ने पार्टी के फैसले का सम्मान करते हुए अपना पद छोड़ दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में पार्टी उनके अनुभव का उपयोग संगठन के भीतर किस रूप में करती है।
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