हमीरपुर। ओमान के तट पर हुए भीषण मिसाइल हमले के आठ दिन बाद, हमीरपुर के वीर सपूत आदित्य शर्मा की पार्थिव देह जब उनके पैतृक गांव भालू पहुंची, तो वहां का माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। 23 वर्षीय मर्चेंट नेवी कैडेट आदित्य की मृत्यु की खबर ने पहले ही पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन वीरवार को उनके घर के आंगन में जब उनका शव पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं। जवान बेटे का बेजान शरीर देखकर उनके माता-पिता और दादी अपनी सुध-बुध खो बैठे और बार-बार बेसुध होते रहे।
आदित्य शर्मा की पार्थिव देह को बुधवार की शाम करीब साढ़े सात से आठ बजे के बीच डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, हमीरपुर लाया गया था। यहां के शवगृह में आदित्य का शव रात भर रखा गया, जिस दौरान जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा किया। प्रशासन की कोशिश थी कि परिजनों को अधिक प्रतीक्षा न करनी पड़े, इसलिए रात भर कागजी कार्रवाई चलती रही ताकि सुबह होते ही अन्य प्रक्रियाएं शुरू की जा सकें।
वीरवार की सुबह करीब 8:00 बजे दो वरिष्ठ चिकित्सकों के एक दल ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को शुरू किया। यह पूरी चिकित्सीय प्रक्रिया बेहद संवेदनशील थी और लगभग साढ़े चार घंटे तक चली। दोपहर 12:30 बजे पोस्टमार्टम संपन्न हुआ। इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि आदित्य का पोस्टमार्टम ओमान में नहीं किया गया था और न ही दिल्ली पहुंचने पर वहां की किसी लैब में इसे अंजाम दिया गया। नियमानुसार और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज में ही यह पूरी प्रक्रिया अपनाई गई।
चिकित्सकीय दल की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आदित्य के सिर पर चोट के बेहद गहरे और गंभीर निशान थे। यह चोटें मिसाइल हमले के दौरान हुए विस्फोट या उसके प्रभाव के कारण लगी प्रतीत होती हैं। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और अन्य नमूनों के माध्यम से हमले की प्रकृति और मृत्यु के वास्तविक कारणों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
आदित्य का सपना मर्चेंट नेवी में एक सफल अधिकारी बनकर अपने देश और परिवार की सेवा करना था, लेकिन एक विदेशी धरती पर हुए इस हिंसक हमले ने उनके सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया। आठ दिनों तक चले अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों और लंबी कागजी कार्रवाई के बाद जब उनका शव हिमाचल की माटी में पहुंचा, तो न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा हमीरपुर इस होनहार बेटे की अंतिम विदाई पर बिलख पड़ा। अस्पताल से लेकर गांव तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी संख्या में ग्रामीण आदित्य को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़े।
चिकित्सकों और पुलिस अधिकारियों ने मिलकर शव को परिजनों के सुपुर्द किया। इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आदित्य का जाना उनके परिवार के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। पूरा गांव इस समय शोक की लहर में डूबा है और लोग नम आंखों से अपने लाडले को याद कर रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्हें सांत्वना देने के लिए क्षेत्र के तमाम लोग वहां मौजूद रहे।