US: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर मुहर – The Hill News

US: अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर मुहर

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से चले आ रहे भारी तनाव और शत्रुतापूर्ण माहौल के बीच शुक्रवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने आधिकारिक रूप से एक शांति समझौते (MoU) पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस महत्वपूर्ण समझौते को फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान वर्साय पैलेस में अंतिम रूप दिया गया। इस घटनाक्रम के साथ ही दोनों देशों के बीच जारी सैन्य गतिरोध पर तत्काल प्रभाव से विराम लग गया है।

इस समझौते का सबसे बड़ा और वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाला फैसला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलना है। अब इस जलमार्ग से वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाजों का आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इन डिजिटल हस्ताक्षरों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है और घोषणा की है कि यह शांति समझौता अब औपचारिक रूप से पूरे विश्व में प्रभावी हो चुका है।

व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में डोनल्ड ट्रंप को वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ रात्रिभोज के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए देखा गया। हस्ताक्षर के तुरंत बाद अपनी संक्षिप्त प्रतिक्रिया में डोनल्ड ट्रंप ने इस कूटनीतिक जीत को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच अब समझौता हो चुका है और उन्होंने वर्साय में इसे अंतिम रूप दे दिया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस मुकाम तक पहुंचना बिल्कुल भी आसान नहीं था।

यह आधिकारिक समझौता उसी मूल ढांचे पर टिका है जिस पर पिछले रविवार को दोनों राष्ट्रों के बीच सहमति बनी थी। इसमें आपसी दुश्मनी को तुरंत त्यागने और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जाहिर की गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने पिछले सप्ताहांत ही प्रारंभिक शांति दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

पूर्व निर्धारित योजना के तहत, इस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक व्यक्तिगत और भव्य हस्ताक्षर समारोह आयोजित करने की तैयारी थी। हालांकि, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हस्ताक्षर प्रक्रिया पूरी होने के कारण इस पूरी समयसीमा में अप्रत्याशित तेजी आई और समझौता तय वक्त से पहले ही प्रभावी हो गया।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल हस्ताक्षरों के बावजूद उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के स्विट्जरलैंड जाने की संभावना अभी भी बनी हुई है। हालांकि, अब उनकी वहां की भूमिका केवल एक औपचारिक औपचारिकता मात्र ही रह जाएगी। इस समझौते ने न केवल खाड़ी क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगाई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत दी है। दोनों देशों के बीच हुए इस कूटनीतिक समाधान को विश्व राजनीति के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

 

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