US: अमेरिका ईरान शांति समझौते में ट्रंप ने पुनर्निर्माण फंड देने से किया इनकार

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बीते दिन घोषित किए गए ऐतिहासिक शांति समझौते में हस्ताक्षर से पहले ही बड़ा पेंच फंसता नजर आ रहा है। महीनों से जारी सैन्य संघर्ष और कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए ईरान ने जिस 300 अरब डॉलर के भारी-भरकम पुनर्निर्माण फंड की मांग की थी, उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। डोनल्ड ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि समझौते में किसी भी प्रकार के नकद भुगतान या पैसे को लेकर कोई बात नहीं हुई है।

डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान इस बात पर पूरी तरह सहमत हो गया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच हुए इस अंतरिम शांति समझौते के तहत तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य और उसकी सीमाओं को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

भ्रामक खबरों पर डोनल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात पर गहरा संदेह जताया कि क्या ईरान को शांति समझौते के तहत कोई आर्थिक मदद मिलेगी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न रखने की शर्त पर राजी हो गया है। साथ ही उन्होंने उन खबरों को ‘डेमोक्रेट्स’ द्वारा फैलाई गई ‘झूठी खबर’ बताया, जिनमें यह कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर देने जा रहा है। यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि जहां ईरानी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ ने 300 अरब (बिलियन) डॉलर के फंड का दावा किया था, वहीं डोनल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में 300 मिलियन डॉलर लिखकर इसे खारिज किया है।

शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने हैं हस्ताक्षर
इस महत्वपूर्ण समझौते पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस ‘समझौता ज्ञापन’ (MoU) में यह प्रावधान है कि यदि तेहरान कुछ अनिवार्य शर्तें पूरी करता है, तो उसके बदले में ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी किया जा सकता है और उसे प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण में सहायता के लिए वित्तीय मदद की संभावना भी जताई गई थी। हालांकि, अभी तक इस दस्तावेज की कोई भी आधिकारिक प्रति सार्वजनिक नहीं की गई है।

समझौते की मुख्य बातें

  • शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए स्विट्जरलैंड में बैठक प्रस्तावित।

  • ईरान का परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प।

  • 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड पर डोनल्ड ट्रंप की असहमति।

  • व्हाइट हाउस द्वारा इसी सप्ताह समझौते का मूल पाठ (Text) जारी करने की योजना।

फंड के आंकड़ों पर मतभेद
शांति समझौते में आर्थिक सहायता को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ईरानी मीडिया जहां 300 अरब (Billion) डॉलर के फंड का दावा कर रहा है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने 300 मिलियन डॉलर का जिक्र करते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह केवल विपक्षी दलों द्वारा फैलाई गई अफवाह है।

जेडी वेंस ने दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस मामले में प्रशासन का रुख साफ किया है। उन्होंने एक टीवी साक्षात्कार में बताया कि व्हाइट हाउस इसी सप्ताह इस समझौते का पूरा विवरण जारी कर देगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक ईरान अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ पूरा नहीं करता, तब तक उसे एक पैसा भी नहीं दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय राहत या फंड केवल कागजी समझौते पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ईरान के प्रदर्शन और उसकी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल, इस नए मोड़ ने शुक्रवार को होने वाले हस्ताक्षर समारोह की शर्तों और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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