Uttarakhand: पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर आरएसएस और भाजपा के बीच गहरा मंथन

चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब आठ घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ दोबारा चुनावी गठबंधन करने का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। सूत्रों के मुताबिक, संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पंजाब के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को समझने के लिए भाजपा नेताओं से फीडबैक लिया और यह जानने की कोशिश की कि क्या अकाली दल के साथ समझौता करना भविष्य के लिए फायदेमंद होगा।

चंडीगढ़ में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में आरएसएस के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार, भाजपा के संगठन महासचिव बी.एल. संतोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए। संघ की ओर से पंजाब संगठन सचिव मंत्री श्रीनिवासुलु और वरिष्ठ पदाधिकारी सौदान सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु पंजाब में 2027 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करना था।

चर्चा के दौरान पंजाब भाजपा के एक प्रभावशाली गुट ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की वकालत की। इन नेताओं का तर्क है कि पंजाब की ग्रामीण बेल्ट और पारंपरिक सिख मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए अकाली दल का साथ जरूरी है। उनका मानना है कि अकेले चुनाव लड़ने की तुलना में गठबंधन के साथ उतरना राजनीतिक रूप से अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो सकता है। हालांकि, स्थानीय नेताओं की इस राय के उलट केंद्रीय नेतृत्व का रुख अब भी स्पष्ट है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कई मंचों से यह कह चुके हैं कि भाजपा पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में गठबंधन की संभावनाओं पर अंतिम मुहर केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय के बाद ही लगेगी।

बैठक में भाजपा के प्रदर्शन और जनाधार विस्तार पर भी संतोष जताया गया। आंकड़ों के माध्यम से बताया गया कि पार्टी का ग्राफ पंजाब में तेजी से बढ़ रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर जो केवल 9.63 प्रतिशत था, वह 2024 के चुनाव में बढ़कर 18.56 प्रतिशत हो गया है। इस वृद्धि को देखते हुए आरएसएस ने निर्देश दिया है कि अब युवाओं, किसानों, महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और डेरा अनुयायियों जैसे विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच और अधिक प्रभावी बनाई जाए।

रणनीतिक चर्चा के दौरान पंजाब की कानून-व्यवस्था, नशाखोरी, जबरन धर्मांतरण और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों को आगामी चुनाव के लिए प्रमुख हथियार बनाने पर सहमति बनी। साथ ही सीमा पार से होने वाले आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों पर भी चिंता जताई गई। बैठक में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ लिए गए फैसलों के संभावित राजनीतिक परिणामों का भी विश्लेषण किया गया।

आरएसएस के नेतृत्व ने विश्वास जताया कि जिस तरह हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कठिन चुनौतियों के बावजूद संगठन ने खुद को स्थापित किया है, उसी तरह पंजाब में भी भाजपा एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। कार्यकर्ताओं को संदेश दिया गया है कि वे जमीनी स्तर पर सक्रिय हों और नए सामाजिक वर्गों को पार्टी की विचारधारा से जोड़ें ताकि आगामी चुनाव में पार्टी ऐतिहासिक सफलता दर्ज कर सके।

 

Pls reaD:Uttarakhand: कुम्भ मेला और जन विकास की योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सौ पांच करोड़ रुपये स्वीकृत किए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *