नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने नेतन्याहू पर ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े जवाबी हमले को रोकने के लिए दबाव डाला और उन्हें भविष्य के प्रति सावधान रहने को कहा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान और इजरायल के बीच सीधे हमले हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया कि जब इजरायल ईरान के दर्जनों संवेदनशील ठिकानों पर बड़े हमले करने की योजना बना रहा था, तब उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू से सीधे बात की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से स्पष्ट कहा कि उन्हें अब बहुत संभलकर कदम उठाना होगा, अन्यथा वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले पड़ सकते हैं। ट्रंप का यह दखल उस समय हुआ जब इजरायल ने रविवार को हुए ईरानी मिसाइल हमलों के जवाब में पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों पर निशाना साधा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कड़े रुख के बाद इजरायली प्रधानमंत्री पीछे हटने को तैयार हो गए हैं। इजरायली सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू ने आश्वासन दिया है कि यदि ईरान की ओर से दोबारा कोई हमला नहीं होता है, तो इजरायल भी अपनी सैन्य कार्रवाई को रोक देगा। सोमवार तक दोनों देशों की ओर से युद्ध रोकने के संकेत मिल चुके थे। ईरान ने घोषणा की कि वह अपनी ओर से हमले बंद कर रहा है, जिसके बाद नेतन्याहू ने भी इजरायली हमलों को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी बातचीत पर कहा कि उन्होंने नेतन्याहू को कोई सीधा आदेश देने के बजाय उनकी समझदारी और विवेक पर भरोसा जताया। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे ईरान के साथ एक बहुत ही मजबूत और बेहतर समझौते पर हस्ताक्षर करने के करीब हैं, इसलिए वे क्षेत्र में शांति बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया के कई देशों ने वॉशिंगटन से संपर्क कर इस मामले में अमेरिकी हस्तक्षेप की मांग की थी क्योंकि वे युद्ध के विस्तार को लेकर काफी डरे हुए थे।
अमेरिकी प्रशासन को ईरान की ओर से भी संदेश मिले थे, जिनमें कहा गया था कि यदि इजरायल अपने हमले बंद कर देता है, तो ईरान भी शांति बनाए रखेगा। ट्रंप ने स्वीकार किया कि इजरायल ने अपने जवाबी हमलों के बारे में उन्हें बहुत ही कम समय पहले सूचित किया था और जब तक बातचीत हुई, तब तक उनके विमान कार्रवाई के लिए निकल चुके थे। हालांकि, ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अंततः इजरायली हमलों के दायरे को सीमित करवा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान इजरायली अधिकारियों और प्रधानमंत्री ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी संभावित लक्ष्यों को लेकर चर्चा की थी। सूत्रों का कहना है कि नेतन्याहू और ट्रंप के बीच हुई हालिया बातचीत पिछली मुलाकातों की तुलना में काफी शांत और विनम्र रही। बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने तर्क दिया था कि यदि इजरायल ईरान के मिसाइल हमलों का जवाब नहीं देता है, तो इससे अमेरिका और इजरायल दोनों की साख को नुकसान होगा और ईरान को लगेगा कि वह दोनों देशों की सैन्य कार्रवाई को रोक सकता है। हालांकि, ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट रखा कि वे किसी बड़े युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और दुनिया की नजरें ट्रंप के आगामी राजनयिक कदमों पर टिकी हैं।
Pls read:US: अमेरिकी सदन में यूक्रेन की सहायता और रूस पर नए प्रतिबंध पारित