टिहरी गढ़वाल, 5 जून 2026। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का आंकलन करना और स्थानीय जनता की समस्याओं का समाधान तलाशना था। मुख्य सचिव ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित करते हुए विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आपसी तालमेल पर जोर दिया।
बैठक के दौरान आनन्द बर्द्धन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन समस्याओं का समाधान स्थानीय या जिला स्तर पर संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर वहीं निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि जनता को छोटे-छोटे कार्यों के लिए राज्य मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष बल दिया, ताकि विकास योजनाओं का लाभ समय पर आम जन तक पहुंच सके।
बैठक में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने क्षेत्रीय असमानताओं और आरक्षित क्षेत्र के विस्तार से जुड़े जटिल विषयों पर मुख्य सचिव का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार और घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह ने भविष्य में होने वाली आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों को पुख्ता करने की मांग की। उन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए जरूरी संसाधनों और उपकरणों को अग्रिम रूप से उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई।
देवप्रयाग विधायक विनोद कण्डारी ने क्षेत्र में पेयजल की किल्लत और पर्यटन को बढ़ावा देने वाली रोपवे परियोजनाओं में तेजी लाने का मुद्दा उठाया। दर्जाधारी मंत्री जोत सिंह बिष्ट ने नदियों के किनारों पर आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने का सुझाव दिया, जबकि दर्जाधारी मंत्री विनोद सुयाल ने यात्रा सीजन के दौरान ऋषिकेश-देवप्रयाग मार्ग पर बढ़ते वाहनों के दबाव और यातायात प्रबंधन की चुनौतियों का जिक्र किया।
नगर निकाय प्रतिनिधियों ने भी स्थानीय मुद्दों को मजबूती से रखा। नई टिहरी नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने विस्थापित शहर की समस्याओं को लेकर एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। बदरी-केदार मंदिर समिति के सदस्य दिनेश डोभाल ने नगर पंचायत घनसाली की भूमि के नियमितीकरण और चारधाम यात्रियों को नई टिहरी शहर से जोड़ने के लिए प्रभावी नीति बनाने की मांग की। चम्बा और देवप्रयाग के प्रतिनिधियों ने पार्किंग सुविधाओं के अभाव को लेकर चिंता जताई, जबकि घनसाली और चमियाला के क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमलों से हो रहे नुकसान का समाधान निकालने का आग्रह किया गया।
विभिन्न विकासखंडों के प्रमुखों ने भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े विषयों को साझा किया। मुख्य सचिव ने सभी जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इन समस्याओं पर त्वरित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावी कार्यवाही करें। इस अवसर पर जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और नगर पालिकाओं व पंचायतों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के समापन पर यह संदेश दिया गया कि विकास केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि जनता के साथ निरंतर संवाद और पारदर्शिता का परिणाम होना चाहिए। बैठक में शोभनी धनोला, नीलम विजल्वाण, ममता देवी, विनीता बिष्ट, आनन्द बिष्ट, गोविन्द सिंह राणा और रोशन रांगड़ सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
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