शिमला। हिमाचल प्रदेश में कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसलों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया की समीक्षा करने के लिए आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट उप-समिति की बैठक में सरकारी निर्णयों के निष्पादन की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। इस अवसर पर आवास, तकनीकी शिक्षा और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धरमानी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान उप-समिति ने पिछले ढाई वर्षों में कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त की। समिति को आधिकारिक आंकड़ों के माध्यम से जानकारी दी गई कि 13 जनवरी, 2023 से 30 जून, 2025 के बीच कैबिनेट ने विभिन्न जनहितकारी विषयों पर कुल 1,160 महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे। सरकार के लिए यह संतोष का विषय रहा कि इनमें से 99 प्रतिशत निर्णयों को पूरी तरह से लागू किया जा चुका है। यह आंकड़ा राज्य प्रशासन की कार्यकुशलता और सरकारी प्राथमिकताओं को समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
समिति ने उन शेष एक प्रतिशत निर्णयों पर भी गहन मंथन किया, जो अभी तक पूर्ण रूप से धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। ये लंबित निर्णय मुख्य रूप से वित्त, स्वास्थ्य, उद्योग, जल शक्ति, बहुउद्देशीय परियोजनाएं और ऊर्जा विभागों से संबंधित हैं। इन विभागों के अंतर्गत आने वाले कार्यों में आ रही तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए जगत सिंह नेगी ने कैबिनेट फैसलों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संबंधित अधिकारियों और विभागों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में निर्णयों का सफल क्रियान्वयन प्रशासन की सक्रियता का प्रमाण है। हालांकि, उन्होंने शेष बचे हुए एक प्रतिशत निर्णयों को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश भी दिए। नेगी ने कहा कि जो भी कार्य अभी प्रक्रियाधीन हैं, उन्हें एक निर्धारित समय सीमा के भीतर तेजी से पूरा किया जाए ताकि जनता को सरकार की सभी योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के मिल सके।
बैठक में प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर शामिल थे। इनके अलावा स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, सहकारिता सचिव अमरजीत सिंह, डिजिटल प्रौद्योगिकी और शासन सचिव आशीष सिंहमार, सदस्य सचिव हरबंस सिंह ब्रासकोन, शहरी विकास निदेशक नीरज कुमार तथा कोष, लेखा और लॉटरी निदेशक विजय वर्धन ने भी बैठक में हिस्सा लिया और अपने-अपने विभागों से संबंधित रिपोर्ट पेश की।
उप-समिति ने इस बात पर जोर दिया कि विकास कार्यों की नियमित निगरानी ही शासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाती है। मंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी बैठकों में शेष बचे हुए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट के साथ उपस्थित हों ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
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