नई दिल्ली। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और ऊर्जा संकट अब इतने गंभीर मोड़ पर पहुंच गए हैं कि राजधानी इस्लामाबाद में व्यवसायों के संचालन के समय में भारी कटौती करनी पड़ी है। जिला प्रशासन ने एक नई समय-सारिणी लागू की है, जिसके तहत सोमवार से सभी बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को रात 8 बजे तक बंद करना अनिवार्य होगा। यह निर्णय मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा लागत में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और देश के भीतर बढ़ते बिजली संकट के जवाब में लिया गया है।
डिप्टी कमिश्नर इरफान मेमन के नेतृत्व वाले जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन नए आदेशों की घोषणा की। प्रशासन के अनुसार, अब हफ्ते के हर दिन बाजारों को रात 8 बजे तक अपनी दुकानें बढ़ानी होंगी। हालांकि, आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेस्टोरेंट, बेकरी और किराने की दुकानों को थोड़ी राहत दी गई है; ये प्रतिष्ठान रात 10 बजे तक खुले रह सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये कदम सरकारी खर्च में कटौती और बिजली की खपत को नियंत्रित करने के व्यापक उपायों का हिस्सा हैं।
संशोधित समय-सारिणी के अनुसार, सभी शॉपिंग मॉल और आम दुकानें रात 8 बजे बंद हो जाएंगी। मैरिज हॉल और अन्य आयोजनों के लिए बने मार्कीज के लिए भी रात 10 बजे तक का ही समय निर्धारित किया गया है। लेकिन, कुछ आवश्यक सेवाओं को इन पाबंदियों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। अस्पतालों, फार्मेसी, पेट्रोल पंप, डेयरी की दुकानों, कॉल सेंटरों और अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनियों पर ये समय सीमा लागू नहीं होगी, ताकि जरूरी सेवाओं और विदेशी मुद्रा कमाने वाले क्षेत्रों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि निजी संपत्तियों पर होने वाले बड़े कार्यक्रमों और समारोहों पर भी रात 10 बजे के बाद पाबंदी रहेगी।
पाकिस्तान सरकार का यह कड़ा फैसला उस पृष्ठभूमि में आया है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। सरकार ने बिजली की बचत के लिए मार्च में ही कामकाज के घंटों को कम करने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया था, जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। पारंपरिक रूप से पाकिस्तान के बाजारों का मिजाज ऐसा रहा है कि वे दोपहर के बाद खुलते हैं और देर रात तक सक्रिय रहते हैं, इसलिए व्यापारी वर्ग इन पाबंदियों का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि इससे व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा।
ऊर्जा के क्षेत्र में पाकिस्तान की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है क्योंकि वह अपनी ईंधन जरूरतों के लिए ‘हार्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के समुद्री मार्ग पर पूरी तरह निर्भर है। क्षेत्रीय तनाव के कारण यद्यपि कुछ टैंकरों को रास्ता मिल रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंचे शिपमेंट खर्च ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। ऊर्जा की कमी और बढ़ती लागत ने सरकार को इन कड़े उपायों की ओर धकेल दिया है, जिससे राजधानी सहित देश के अन्य प्रमुख शहरों की रौनक अब फीकी पड़ने लगी है। प्रशासन का मानना है कि इन उपायों से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।
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