शिमला। हिमाचल प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अब जिला परिषद के परिणामों में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रदेश के कुल 250 जिला परिषद वार्डों में से अब तक घोषित 229 सीटों के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण मतदाताओं ने भाजपा पर एक बार फिर भरोसा जताया है। अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 136 सीटों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस मात्र 52 वार्डों में सिमट कर रह गई है। इसके अतिरिक्त, 43 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी ताकत दिखाते हुए जीत हासिल की है। अभी 18 सीटों पर मतगणना की प्रक्रिया जारी है।
जिलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो भाजपा ने अधिकांश क्षेत्रों में कांग्रेस को पछाड़ दिया है। सिरमौर जिले में 17 में से 11 सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा, जबकि कांग्रेस को केवल तीन सीटें मिलीं। किन्नौर जैसे जनजातीय जिले में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए 10 में से नौ सीटें जीतीं। ऊना और सोलन जिलों में भी भाजपा का दबदबा रहा, जहां पार्टी ने क्रमशः 11 और 10 वार्डों में जीत दर्ज की। ऊना में कांग्रेस को चार और सोलन में पांच सीटें प्राप्त हुईं।
विशेष रूप से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर में भी भाजपा का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। यहाँ के 19 वार्डों में से 15 पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। हालांकि, मुख्यमंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र नादौन के अमलैहड़ वार्ड से कांग्रेस समर्थित रविंद्र गद्दी चुनाव जीतने में सफल रहे। मुख्यमंत्री के जिले में भाजपा की इस बड़ी जीत को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंडी जिले में भाजपा ने 36 में से 26 सीटों पर जीत हासिल कर अपना वर्चस्व कायम रखा। यहाँ कांग्रेस को केवल तीन सीटें मिलीं और सात सीटों पर निर्दलीय जीते। मंडी में कई दिग्गजों के परिवार के सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर और कांग्रेस उपाध्यक्ष चेतराम ठाकुर के बेटे तरुण ठाकुर चुनाव हार गए। वहीं, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह की बेटी वंदना गुलेरिया को भी मात्र 51 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हार का स्वाद चखना पड़ा।
कुल्लू और चंबा जिलों में भी रोचक मुकाबले देखने को मिले। कुल्लू की 14 सीटों में से नौ भाजपा के खाते में गईं, जबकि चंबा में मुकाबला बराबरी का रहा, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 6-6 सीटों पर जीत दर्ज की। लाहुल-स्पीति में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा, जहां उसने पांच सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को तीन सीटें मिलीं। कांगड़ा जिले में, जो राज्य का सबसे बड़ा जिला है, भाजपा 22 सीटों के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, यहाँ कांग्रेस को 12 और निर्दलीयों को 14 सीटें मिली हैं।
मतगणना के दौरान कुछ तकनीकी अड़चनें भी आईं। कुल्लू के बंजार स्थित मंगलौर वार्ड में मतपत्रों पर गलत नाम अंकित होने के कारण पंचायत समिति सदस्य की गिनती काफी समय तक रुकी रही, जिस पर राज्य निर्वाचन आयोग ने रिपोर्ट तलब की है। आंकड़ों की बात करें तो इस बार जिला परिषद की 250 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि पंचायत समिति की 1769 सीटों में से 95 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। रविवार देर शाम तक पंचायत समिति के परिणामों की घोषणा भी लगभग पूरी हो चुकी है। इन परिणामों ने प्रदेश की ग्रामीण राजनीति में भाजपा की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है।
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