नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में भारत अब अपनी पहचान केवल एक खरीदार के रूप में नहीं बल्कि एक निर्माता के रूप में मजबूती से स्थापित कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) परियोजना के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर दिया है। यह कदम देश के पहले पूर्ण स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट कार्यक्रम को वास्तविकता में बदलने की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से भारत अपनी वायु शक्ति को अत्याधुनिक बनाने के साथ-साथ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखने की ओर अग्रसर है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना की सबसे खास बात भारतीय निजी क्षेत्र को दिया गया बड़ा मौका है। सरकार ने इस बार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इस विशिष्ट प्रक्रिया से अलग रखा है। इसके स्थान पर रक्षा मंत्रालय ने तीन प्रमुख निजी कंपनियों के समूहों (कंसोर्टियम) को आरएफपी जारी किया है। इन समूहों में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत फोर्ज-बेमल के कंसोर्टियम शामिल हैं। यह बदलाव भारतीय रक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और उन पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
लगभग 15,000 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम परियोजना के तहत चयनित की जाने वाली निजी कंपनी आंध्र प्रदेश में एक नया ‘ग्रीनफील्ड सुविधा केंद्र’ स्थापित करेगी। यह केंद्र आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में 650 एकड़ की विशाल भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसी अत्याधुनिक सुविधा केंद्र में एएमसीए के पांच प्रारंभिक प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जो भविष्य में भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनेंगे।
तकनीकी विकास और सहयोग के स्तर पर यह प्रोजेक्ट सरकार द्वारा पूरी तरह वित्तपोषित है। इसमें निजी भागीदार को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के अधीन आने वाली एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के साथ मिलकर काम करना होगा। यह आपसी सहयोग भारत की अत्याधुनिक एयरोस्पेस तकनीक को और अधिक विकसित करने में सहायक होगा।
परियोजना की समय सीमा को लेकर भी स्पष्ट खाका तैयार किया गया है। एडीए और डीआरडीओ ने साल 2025 के मध्य में अभिरुचि पत्र (EOI) जारी किए थे, जिसके जवाब में सात कंपनियों ने अपनी इच्छा जताई थी। फरवरी में हुए तकनीकी मूल्यांकन के बाद तीन मुख्य कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन कंपनियों को अपने विस्तृत प्रपोजल जमा करने के लिए दो से तीन महीने का समय दिया गया है।
उम्मीद की जा रही है कि सबसे कम बोली लगाने वाले (L1) का चयन और अनुबंध की प्रक्रिया जनवरी से मार्च 2027 तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य में तेजी आएगी और विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 से 2032 के बीच अपनी पहली उड़ान भर सकता है। बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद, इन अत्याधुनिक विमानों को 2035 के बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किए जाने की संभावना है।
यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक उत्कृष्ट मिसाल साबित होगी। इससे न केवल देश के भीतर उन्नत सैन्य तकनीक का विकास होगा, बल्कि भारत फाइटर जेट निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरेगा। निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय पर पूरा करने और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। एएमसीए न केवल वायुसेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
Pls read:Delhi: हिंद महासागर में भारतीय नौसेना ने व्यापारिक जहाज को लुटेरों से बचाया