नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अधर में लटकती नजर आ
रही है। इस गतिरोध की मुख्य वजह परमाणु मुद्दा बना हुआ है। ईरान ने पाकिस्तान के
माध्यम से अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसका उद्देश्य होर्मुज
जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खुलवाना है। हालांकि, अमेरिकी
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर अपनी असहमति जताई है और कड़ा रुख
अपनाते हुए कहा है कि ईरान वर्तमान में पतन के कगार पर है।
ईरान द्वारा भेजे गए इस नए प्रस्ताव में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को खत्म करने
और युद्ध को समाप्त करने की बात कही गई है। प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया
है कि परमाणु मुद्दे पर अलग से बातचीत की जाए। व्हाइट हाउस में अपने सुरक्षा
सलाहकारों के साथ बैठक के दौरान डोनल्ड ट्रंप ने इस पर विस्तार से चर्चा
की। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इस बात से संतुष्ट नहीं
हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सवालों को टाल रहा है। अमेरिकी
प्रशासन का मानना है कि इस प्रस्ताव को स्वीकार करना उनकी कूटनीतिक जीत को
कमजोर कर सकता है।
डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के माध्यम
से दावा किया कि ईरान ने अमेरिका को सूचित किया है कि उनकी स्थिति बहुत खराब है
और वे पतन की स्थिति में हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान चाहता है कि अमेरिका जल्द से
जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे क्योंकि वे अपने नेतृत्व के संकट का समाधान
निकालने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह जलमार्ग 28 फरवरी को युद्ध शुरू
होने के बाद से लगभग बंद है, जिससे वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत
हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को
परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनके लिए सबसे प्रमुख विषय है।
उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान का मौजूदा प्रस्ताव
स्वीकार्य नहीं है क्योंकि किसी भी भविष्य के समझौते में ईरान को
परमाणु शक्ति बनने से पूरी तरह रोकने का पुख्ता प्रावधान होना चाहिए। व्हाइट
हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने भी दोहराया कि अमेरिका उस युद्ध को समाप्त
करने का प्रयास कर रहा है, जो फरवरी में इजरायल के साथ मिलकर शुरू हुआ था, लेकिन वह
अपनी शर्तों को लेकर बहुत स्पष्ट है।
इस राजनीतिक अनिश्चितता के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस पहुँच गए
हैं। उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से
मुलाकात की और कूटनीतिक समर्थन के लिए उनका आभार जताया। अराघची ने कहा
कि क्षेत्र में अस्थिरता के बावजूद ईरान और रूस के बीच सहयोग और संबंध लगातार
मजबूत हो रहे हैं। पुतिन से उनकी वार्ता सफल रही है, जिससे ईरान को
अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस का साथ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अब
पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच
परमाणु मुद्दे पर कोई सहमति बन पाती है या नहीं।
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