ऋषिकेश, 24 अप्रैल 2024।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस
अवसर पर उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य के दिग्गजों को संबोधित करते हुए
उन्हें समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का बोध कराया। उन्होंने सभी स्नातक
डिग्री धारकों से आह्वान किया कि वे अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत सहानुभूति, पूर्ण
ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ करें।
समारोह को संबोधित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं
है, बल्कि यह मानवता की सेवा का सबसे पवित्र मार्ग है। उन्होंने छात्रों को
प्रेरित किया कि वे मरीजों के उपचार के दौरान मानवीय संवेदनाओं को
सर्वोपरि रखें। उनके अनुसार, एक सफल चिकित्सक वही है जो न केवल बीमारियों
का इलाज करे, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता भी दिखाए।
उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के निरंतर होते विस्तार और इसकी उपलब्धियों की सराहना
की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल बड़े अस्पतालों
की इमारतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इनका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े
व्यक्ति तक पहुंचना अनिवार्य है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हो रहे
तकनीकी सुधारों का जिक्र करते हुए एम्स ऋषिकेश में टेलीमेडिसिन और अन्य
नवाचारों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि तकनीक और नवाचार के माध्यम से हम
दूरदराज के क्षेत्रों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कोविड
महामारी के दौरान देश की समान प्रतिक्रिया को रेखांकित किया। उन्होंने
‘वैक्सीन मैत्री’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में भारत ने
न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी
वैक्सीन उपलब्ध कराकर मानवता की मिसाल पेश की। यह पहल भारत की प्राचीन ‘वसुधैव
कुटुंबकम’ की भावना को प्रदर्शित करती है।
इस दौरान उपराष्ट्रपति ने उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे को
मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की भी सराहना
की। उन्होंने कहा कि धामी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को
सुदृढ़ किया जा रहा है और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो
रहा है।
दीक्षांत समारोह के अंत में उन्होंने सभी उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं को उनके
उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये
युवा चिकित्सक अपनी दक्षता और सेवा भाव से देश के स्वास्थ्य ढांचे को नई
ऊंचाइयों पर ले जाएंगे और एक स्वस्थ भारत के निर्माण में अपना बहुमूल्य
योगदान देंगे।
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