नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर अशांति का केंद्र बन गया है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने घोषणा की है कि उसकी नौसेना ने होर्मुज पार करने का प्रयास कर रहे दो बड़े मालवाहक जहाजों को रोक लिया है। ईरानी नौसेना के अनुसार, इन दोनों जहाजों को ईरानी प्रादेशिक जल क्षेत्र में ले जाने का आदेश दिया गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और अधिक गहरा गया है।
ईरानी मीडिया और अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ की रिपोर्ट के अनुसार, रोके गए जहाजों की पहचान ‘एमएससी-फ्रांसेस्का’ (MSC-FRANCESCA) और ‘एपापिनोंडास’ (EPAMINONDAS) के रूप में हुई है। आईआरजीसी ने दावा किया है कि ‘एमएससी-फ्रांसेस्का’ इजरायल के साथ आर्थिक रूप से जुड़ा हुआ है और ‘जायोनी शासन’ के हितों की रक्षा कर रहा था। वहीं, दूसरे जहाज ‘एपापिनोंडास’ पर आरोप लगाया गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन प्रणालियों के साथ छेड़छाड़ कर रहा था, जिससे समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
आईआरजीसी नौसेना ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और व्यवस्था में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उसकी ‘रेड लाइन’ है। ईरान का दावा है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और वह किसी भी संदिग्ध गतिविधि के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगा। ईरानी नौसेना ने इन जहाजों को जब्त करने के बाद उन्हें तट की ओर सुरक्षित रूप से ले जाने की बात कही है।
एक ओर जहां ईरान अन्य देशों के जहाजों को रोक रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के बावजूद अपना कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का दावा किया है। तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, हाल ही में दो ईरानी तेल टैंकरों ने अमेरिकी नौसेना की सख्ती को धता बताते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है। विभिन्न ट्रैकिंग डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि नाकाबंदी शुरू होने के बाद से ईरान वैकल्पिक मार्गों और फ्लोटिंग स्टोरेज का उपयोग करके अब तक लगभग 90 लाख बैरल कच्चा तेल सफलतापूर्वक निर्यात कर चुका है।
यह ताजा घटनाक्रम दर्शाता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में शक्ति प्रदर्शन का खेल खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नाकाबंदी के बावजूद ईरान की इस आक्रामक कार्यवाही ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विश्व समुदाय इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है क्योंकि इस रणनीतिक जलमार्ग में किसी भी बड़े टकराव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।
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