देहरादून। सचिवालय में उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन समिति की उच्चाधिकार समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक के दौरान समिति की विभिन्न गतिविधियों और आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने वन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अपनी मंजूरी प्रदान की और भविष्य के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
बैठक में अखरोट विकास कार्यक्रम की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने इस योजना के तहत लगाए गए अखरोट के पौधों की वर्तमान स्थिति और उनके विकास की अद्यतन जानकारी मांगी। उन्होंने संबंधित प्रभाग के डीएफओ को निर्देश दिए कि वे इन पौधों का व्यापक मूल्यांकन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। मुख्य सचिव ने यह भी जानने की इच्छा जताई कि इस योजना से जुड़े किसानों को फलोत्पादन के क्षेत्र में अब तक कितनी सफलता मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मूल्यांकन के आधार पर ही विभाग आगामी वर्षों के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार कर सकेगा।
उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए भूस्खलन और मृदा अपरदन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जापानी तकनीक के उपयोग पर बल दिया गया। मुख्य सचिव ने बताया कि जापान के तकनीकी सहयोग से ‘मृदा अपरदन नियंत्रण और अवसाद आपदा शमन’ के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि इस जापानी तकनीक के मुख्य पहलुओं और अनुभवों को आपदा प्रबंधन विभाग के साथ साझा किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस आधुनिक तकनीक के समन्वय से उत्तराखंड में भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में मुख्य सचिव ने स्वयं सहायता समूहों, क्लस्टर्स और राज्य स्तरीय फेडरेशन की क्षमता विकास पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन समूहों को न केवल प्रशिक्षण दिया जाए, बल्कि उन्हें उचित बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘हैंड होल्डिंग’ यानी निरंतर सहयोग भी प्रदान किया जाए। उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि राज्य में जिस प्रकार पिरूल (चीड़ की पत्तियां) के प्रबंधन पर काम हो रहा है, उसी तर्ज पर हानिकारक लैंटाना घास के निस्तारण और उपयोग के लिए भी विशेष कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
इस उच्चस्तरीय बैठक में पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, धीराज गर्ब्याल, सी. रविशंकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार और अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित वन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ इन योजनाओं को धरातल पर उतारने और समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने की हिदायत दी।