चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पंजाब कांग्रेस से बाहर होने के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने सक्रिय राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है। उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी’ के गठन की घोषणा की है। नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस नई पार्टी का मुख्य उद्देश्य आम जनता को उनके अधिकार दिलाना और न्याय, शांति व प्रेम के माध्यम से समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
नवजोत कौर सिद्धू का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 8 अक्टूबर 2016 को भाजपा से इस्तीफा दिया था और इसके बाद 28 नवंबर 2016 को कांग्रेस का दामन थामा था। वह अमृतसर से विधायक भी रह चुकी हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। हालांकि, पिछले कुछ समय से उनके और कांग्रेस नेतृत्व के बीच दूरियां काफी बढ़ गई थीं। फरवरी 2026 में कांग्रेस ने उन्हें आधिकारिक रूप से पार्टी से निष्कासित कर दिया था। निष्कासन से पहले वे काफी समय से निलंबित चल रही थीं और उन्होंने स्वयं भी सार्वजनिक रूप से कांग्रेस छोड़ने की मंशा जाहिर की थी। उनके पति और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी पहले ही कांग्रेस से दूरी बना चुके थे, जिसके बाद इस निष्कासन को सिद्धू परिवार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक रिश्तों के अंत के रूप में देखा गया।
नई पार्टी के गठन से पहले नवजोत कौर सिद्धू के भाजपा में वापस जाने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, लेकिन अब उन्होंने अपनी स्वतंत्र पार्टी बनाकर इन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। हाल ही में मार्च 2026 के दौरान उनके जीवन में कुछ आध्यात्मिक बदलाव भी देखे गए थे। वह खमाणों स्थित संत रामपाल के आश्रम पहुंची थीं, जहां उन्होंने राजनीति छोड़कर संतों की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने उस दौरान समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के विरुद्ध अभियान और बिना दहेज के होने वाले विवाहों की सराहना की थी। इसके साथ ही उन्होंने अपने पति के साथ अंगदान का संकल्प भी दोहराया था।
अपनी नई पार्टी की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और नेताओं के काम करने के तरीके का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में जनता को एक मजबूत राष्ट्रीय विकल्प की जरूरत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का उन्हें बाहर करने का फैसला पार्टी में अनुशासन स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा था, लेकिन अब सिद्धू ने अपनी नई राह चुन ली है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी यह नई पार्टी पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में भविष्य में क्या प्रभाव डालती है।