देहरादून। उत्तराखंड शासन ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में उपनल (UPNL) के माध्यम से तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा और कार्यप्रणाली में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग द्वारा प्रदेश के सभी विभागों को दिशा-निर्देश जारी करते हुए आउटसोर्स कर्मियों के लिए अनुबंध (एग्रीमेंट) की एक नई और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके तहत अब सभी विभागों में कार्यरत इन कर्मचारियों के लिए अनुबंध का एक विशिष्ट प्रारूप निर्धारित कर दिया गया है।
संयुक्त सचिव राजेन्द्र सिंह पतियाल की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखंड, नैनीताल के निर्देशों का पालन करते हुए उठाया गया है। उच्च न्यायालय ने पूर्व में दिए गए अपने आदेशों में यह सुनिश्चित करने को कहा था कि आउटसोर्स कार्मिकों और उनसे काम लेने वाले संबंधित विभागों के बीच एक लिखित और स्पष्ट अनुबंध स्थापित होना चाहिए। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कार्य की शर्तों, वेतन (पारिश्रमिक) और कर्मचारियों के उत्तरदायित्वों में पूरी पारदर्शिता बनाए रखना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
शासनादेश में दी गई जानकारी के अनुसार, अब आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय का भुगतान सीधे संबंधित विभागों के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही विभाग और कार्मिक के बीच अनुबंध की शर्तों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा। शासन ने एक मानक अनुबंध प्रारूप तैयार कर सभी विभागों को उपलब्ध करा दिया है, जिसका पालन करना अब अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक कामकाज में सुधार होगा, बल्कि आउटसोर्स पर काम कर रहे हजारों युवाओं को अपने सेवा अधिकारों के प्रति अधिक सुरक्षा का अनुभव होगा।
इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शासन ने सभी प्रमुख सचिवों, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों में इस शासनादेश के प्रावधानों के अनुरूप तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करें। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी आउटसोर्स कर्मचारी बिना मानक अनुबंध के कार्य न करे।
शासन का मानना है कि इस पारदर्शी अनुबंध प्रणाली से विभागों में जवाबदेही तय होगी और आउटसोर्सिंग के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं में गुणवत्ता आएगी। साथ ही, यह नई व्यवस्था कर्मचारियों के मानदेय और उनकी सेवा शर्तों को लेकर व्याप्त अनिश्चितताओं को भी दूर करने में सहायक सिद्ध होगी। न्यायालय के आदेशों के क्रम में की गई यह पहल देवभूमि के सरकारी तंत्र में आउटसोर्सिंग प्रबंधन को एक नया स्वरूप प्रदान करेगी।