Uttarpradesh: भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाले आईएएस रिंकू सिंह राही ने दिया इस्तीफा प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल

अलीगढ़। उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने प्रदेश की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाए हैं। उनका आरोप है कि सरकारी तंत्र में उन्हें उचित तरीके से काम करने का अवसर नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्हें यह कड़ा निर्णय लेना पड़ा। रिंकू सिंह राही की पहचान एक अत्यंत ईमानदार और संघर्षशील अधिकारी के रूप में रही है, जिनका जीवन उतार-चढ़ाव और चुनौतियों से भरा रहा है।

मूल रूप से अलीगढ़ के नौरंगाबाद स्थित डोरी नगर के रहने वाले रिंकू सिंह राही का परिवार एक साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता सौदान सिंह एक आटा-चक्की चलाते थे और इसी सीमित आय से उन्होंने परिवार का भरण-पोषण किया। रिंकू ने इसी अभावपूर्ण माहौल में मेहनत की और सफलता के शिखर तक पहुँचे। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी सरकारी सेवाओं में योगदान दे रहे हैं, जिनमें उनके ताऊ के एक बेटे भारतीय इंजीनियरिंग सेवा में हैं और दूसरे पुलिस विभाग में जेलर के पद पर तैनात हैं।

रिंकू सिंह राही के संघर्ष की कहानी वर्ष 2009 में शुरू हुई थी, जब वह मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उस दौरान उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए करीब 100 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले को उजागर किया था। इस साहसी कदम की उन्हें भारी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी और उन पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में उनके चेहरे पर गोलियां लगी थीं, जिससे उनकी एक आंख की रोशनी चली गई और चेहरे की बनावट भी प्रभावित हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

उनके पिता सौदान सिंह का कहना है कि रिंकू ने हमेशा देशहित को सर्वोपरि रखा और कभी भी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। उनका मानना है कि ईमानदार व्यक्ति के पास बैंक बैलेंस भले न हो, लेकिन उसका आत्मसम्मान और ईमानदारी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। परिवार को इस बात का गर्व है कि रिंकू ने हमेशा सच्चाई का साथ दिया। उनके ताऊ रघुवीर सिंह उसवा ने भी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि रिंकू को अन्य आईएएस अधिकारियों की तरह सम्मानजनक पद और जिम्मेदारी दी जाती, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

रिंकू सिंह राही का इस्तीफा प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है। उनके परिजनों को उम्मीद है कि सरकार उनकी ईमानदारी और योग्यता को समझते हुए उचित निर्णय लेगी। रिंकू की कहानी यह दर्शाती है कि ईमानदारी के मार्ग पर चलना कितना कठिन हो सकता है, लेकिन उन्होंने व्यवस्था की कमियों के सामने झुकने के बजाय अपना रास्ता खुद चुनने का फैसला किया है।

 

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