देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के चहुंमुखी विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए 53.56 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि को वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस बजट का उपयोग शहरी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, सुदूर क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, आपदा राहत कार्यों और महान विभूतियों के सम्मान में किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इन फैसलों से देहरादून से लेकर चमोली और अल्मोड़ा तक की जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
देहरादून शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने और आधुनिक नगरीय सुविधाएं विकसित करने के लिए ‘सिटी मोबिलिटी प्लान’ के तहत 33.45 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अंतर्गत राजधानी में कुल छह महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दिया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य कर विभाग में पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से डिजिटल फॉरेंसिक लैबोरेटरी की स्थापना की जाएगी। नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर (गुजरात) के साथ हुए पांच साल के अनुबंध के तहत इस लैब के लिए 11.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
चमोली जिले में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के लिए भी सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है। अगस्त 2025 के दौरान मानसून की मार झेलने वाले परिवारों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि उन 85 परिवारों को दी जाएगी जिनके घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे और उन 17 लोगों के आश्रितों को प्रदान की जाएगी जिन्होंने आपदा में अपनी जान गंवाई।
मुख्यमंत्री ने हरिद्वार जिले के झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सालियर गांव में हाईवे के पास संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के लिए 37.12 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की दिशा में चम्पावत के 74 ऐसे तोकों (बस्तियों) में बिजली पहुँचाने के लिए 5 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं जहाँ अब तक विद्युत आपूर्ति सुचारू नहीं थी। साथ ही हौली पिपलाटी से ज्योसुडा तक सी.सी. रोड निर्माण के लिए 60.20 लाख रुपये दिए गए हैं।
अल्मोड़ा जिले में सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के कुंवाली न्याय पंचायत में 200 नए बिजली के पोल लगाने के लिए 46.01 लाख रुपये और सल्ट विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जीना की स्मृति में भव्य ‘स्मृति द्वार’ निर्माण के लिए 41.07 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेवानिवृत्त उप वन संरक्षक और भारतीय वन सेवा के अधिकारी किशन चंद के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति दे दी है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत किशन चंद पर चल रहे धन शोधन के मामले में अब विधिक कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सुशासन और विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।