देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सम्मिलित हुए। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित संतों, श्रद्धालुओं और नागरिकों का स्वागत करते हुए देवभूमि की सांस्कृतिक गरिमा को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संतों का सानिध्य और हरि कथा का श्रवण करना जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य है। उन्होंने इसे आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का सबसे सुलभ मार्ग बताया।
कथा व्यास देवकीनंदन ठाकुर की सराहना करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनका जीवन भक्ति और साधना का एक अनूठा उदाहरण है। उन्होंने समाज को सही दिशा देने में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया, विशेष रूप से ‘प्रियाकांत जू विद्या धन योजना’ के माध्यम से बेटियों की शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भौतिकता की इस भागदौड़ में श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करते हैं और जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने में सहायक होते हैं।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, केदारनाथ व बद्रीनाथ धामों का कायाकल्प और काशी विश्वनाथ व महाकाल लोक जैसे गलियारे भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनः स्थापित कर रहे हैं। राज्य स्तर पर किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार केदारखंड और मानसखंड के प्राचीन मंदिरों के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। साथ ही हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार का कार्य भी तेजी से चल रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हरिद्वार-ऋषिकेश और शारदा कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
शिक्षा और कानूनी सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय दर्शन और इतिहास का गहराई से अध्ययन कर सके। उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए उत्तराखंड में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके अलावा, सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने अंत में दोहराया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।