Delhi: जनगणना 2027 में पहली बार खानपान की पसंद और लिव-इन जोड़ों के रिश्तों पर भी मांगे जाएंगे जवाब

नई दिल्ली। भारत की आगामी 16वीं जनगणना केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह देश के बदलते सामाजिक ताने-बाने और जीवनशैली का एक विस्तृत दस्तावेज बनेगी। जनगणना 2027 के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि भारत के लोग क्या खाते हैं, किस प्रकार के घरों में रहते हैं और उनके बीच रिश्तों की क्या स्थिति है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सरकार ने ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल’ पर 33 अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) की सूची जारी की है।

जनगणना के इस नए स्वरूप में पहली बार लोगों के खानपान की पसंद को भी शामिल किया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी के अनुसार, जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में मुख्य रूप से घरों से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी, जिसमें मकान की बनावट, फर्श और छत में इस्तेमाल की गई सामग्री, वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं और परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले अनाज के प्रकार जैसे सवाल शामिल होंगे। इसके अलावा, घर में मौजूद वाहनों और आधुनिक सुविधाओं तक पहुंच के बारे में भी पूछा जाएगा।

सामाजिक रिश्तों को लेकर इस बार एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई लिव-इन कपल अपने रिश्ते को एक स्थिर और स्थायी बंधन मानता है, तो जनगणना के उद्देश्य से उन्हें ‘शादीशुदा जोड़े’ के रूप में ही गिना जाएगा। एफएक्यू में दी गई यह जानकारी दर्शाती है कि जनगणना अब बदलते समय के साथ आधुनिक सामाजिक ढांचों को भी मान्यता दे रही है। यह पोर्टल उन नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी होगा जो खुद अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से भरना चाहते हैं।

जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में ‘हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग’ (HLO) से संबंधित कार्य होगा, जिसमें मकान नंबर, जनगणना हाउस नंबर और घर के फर्श, दीवार व छत में प्रयुक्त सामग्री की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद गणक घर के उपयोग, उसकी वर्तमान स्थिति और वहां रहने वाले लोगों की कुल संख्या का ब्यौरा लेंगे। अंत में, घर के मुखिया का नाम, लिंग, जाति और घर के मालिकाना हक से जुड़ी सूचनाएं संकलित की जाएंगी।

यह व्यापक अभियान भारत की भविष्य की नीतियों के निर्धारण में मील का पत्थर साबित होगा। खानपान और जीवनशैली से जुड़े ये आंकड़े सरकार को स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद करेंगे। डिजिटल पोर्टल के माध्यम से जनता के लिए इस प्रक्रिया में भाग लेना पहले के मुकाबले अधिक आसान और पारदर्शी हो जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाला यह महाभियान देश की बदलती दिशा और दशा को रेखांकित करेगा।

 

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