Punjab: वैज्ञानिकों के प्रयोगों का नुकसान अब नहीं सहेंगे किसान मुख्यमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में दी कड़ी चेतावनी

लुधियाना। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालय प्रबंधन को दो-टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि वैज्ञानिक अपनी नई तकनीकों और बीजों का सीधा परीक्षण किसानों के खेतों पर करना बंद करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों को किसी भी नई तकनीक या बीज को सार्वजनिक करने से पहले उसका गहन परीक्षण स्वयं करना चाहिए और जब परिणाम पूरी तरह सकारात्मक आ जाएं, तभी किसानों को उसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि राज्य के किसान अक्सर यह शिकायत करते हैं कि उन पर और उनकी खेती पर सीधे प्रयोग किए जा रहे हैं। इन प्रयोगों के असफल होने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों में पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही कोई नई विधि धरातल पर उतारें। मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ किसानों ने विश्वविद्यालय से बीज खरीदकर अपनी फसलों की बुवाई की थी, लेकिन बाद में उन फसलों में कीट लग गए और पूरी उपज बर्बाद हो गई। जब प्रभावित किसान अपनी शिकायत लेकर विश्वविद्यालय के पास पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि विश्वविद्यालय की अपनी फसल भी कीटों की चपेट में आ गई है। मुख्यमंत्री ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह के बहाने नहीं चलेंगे। यदि विश्वविद्यालय के बीज या तकनीक में कमी पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों और वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी तय होगी।

मुख्यमंत्री ने बदलते समय के साथ खेती के तरीकों में आधुनिकता लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में कृषि को नई तकनीक के साथ जोड़ना अनिवार्य हो गया है। राज्य सरकार किसानों की मदद के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराई जा रही है ताकि उन्हें सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में सुविधा हो सके। इससे न केवल किसानों का काम आसान होगा बल्कि फसल उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के ढांचे को और अधिक सशक्त बनाने की घोषणा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय के विकास और अनुसंधान कार्यों के लिए राज्य सरकार आवश्यक धन की कमी नहीं होने देगी। उन्होंने पीएयू को किसानों के लिए ‘ज्ञान का केंद्र’ बताया और कहा कि यहाँ से मिलने वाली बीजों, दवाओं और खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी अब किसानों को घर बैठे भी उपलब्ध होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि किसान और वैज्ञानिक सही तालमेल के साथ आधुनिक तकनीक अपनाएंगे, तो पंजाब का कृषि क्षेत्र एक बार फिर देश में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

 

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