गैरसैंण (भराड़ीसैंण)। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का विस्तृत जवाब दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों, भविष्य की रणनीतियों और जनकल्याणकारी नीतियों का पूरा खाका सदन के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मूल मंत्र पर चलते हुए उत्तराखंड को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत उत्तराखंड की पावन धरा के देवी-देवताओं, देश की सीमाओं पर प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की।
पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह स्थान केवल एक भौगोलिक बिंदु नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों की भावनाओं, जन-आकांक्षाओं और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण की जो मूल भावना थी, गैरसैंण उस संकल्प का आधार है। यही कारण है कि उनकी सरकार की प्रत्येक नीति और निर्णय में गैरसैंण की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने राज्य के गठन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद किया और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बाबा केदार की भूमि से की गई घोषणा कि ’21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’, को साकार करना ही उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य है।
राज्य की आर्थिक प्रगति और बजट पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये का बजट ऐतिहासिक है। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत बड़ा है और इसमें राज्य के सवा करोड़ नागरिकों की आशाएं समाहित हैं। उन्होंने गर्व के साथ जानकारी दी कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि हुई है। इसके अलावा, राज्य का बजट जो कभी 60 हजार करोड़ के आसपास हुआ करता था, अब वह 1.11 लाख करोड़ को पार कर गया है, जो राज्य की सुधरती माली हालत का प्रमाण है।
विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने आंकड़ों के जरिए अपनी सरकार की कार्यक्षमता को सिद्ध किया। उन्होंने बताया कि मुख्यसेवक के तौर पर उनके द्वारा की गई कुल 3885 घोषणाओं में से 2408 घोषणाएं पहले ही धरातल पर क्रियान्वित की जा चुकी हैं, जबकि शेष पर कार्य अंतिम चरणों में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार केवल घोषणाएं करने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा कर परिणाम देने में यकीन रखती है।
रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश के लिए 30 से अधिक नई नीतियां लागू की गई हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं। स्टार्टअप के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने लंबी छलांग लगाई है और इनकी संख्या 700 से बढ़कर अब 1750 के करीब पहुंच गई है। पर्यटन, होमस्टे और हेली सेवाओं के विस्तार ने स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के द्वार खोले हैं।
भ्रष्टाचार और नकल माफिया के विरुद्ध उठाए गए कदमों को उन्होंने सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिससे अब भर्ती परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। पिछले साढे चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी रोजगार प्रदान किया गया है। साथ ही, भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के तहत 200 से अधिक लोगों पर कड़ी कार्रवाई की गई है, जिनमें उच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक निर्णयों की चर्चा करते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जिसने इसे लागू कर महिलाओं को समान अधिकार और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया है। इसके साथ ही, राज्य की सांस्कृतिक विरासत और भौगोलिक अस्मिता को बचाने के लिए सख्त भू-कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य के सहयोग से प्रदेश में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग, चारधाम ऑल वेदर रोड और विभिन्न रोपवे परियोजनाएं शामिल हैं, जो आने वाले समय में उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना देंगी। किसानों के लिए तीन लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण और ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 1.70 लाख महिलाओं को सशक्त बनाना सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अपने संबोधन के अंत में पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाते हुए उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में अपना स्थान सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर उस व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए संकल्पित है जो समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा है।