Himachal: हिमाचल में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहीं स्टाफ नर्सों को अब मिलेगा पूरा वेतन मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणा

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी महिलाओं को एक बड़ी सौगात दी है। शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी द्वारा आयोजित एक कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस कार्यक्रम का आयोजन महिलाओं के उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने और उनके सशक्तिकरण पर चर्चा करने के लिए किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नर्सिंग क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए घोषणा की कि अब जो स्टाफ नर्स उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पढ़ाई जारी रखेंगी, उन्हें उनके मूल वेतन का शत-प्रतिशत यानी पूरा वेतन दिया जाएगा।

अभी तक प्रदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली स्टाफ नर्सों को उनके वेतन का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा ही दिया जाता था। मुख्यमंत्री के इस फैसले से अब उन नर्सों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपनी सेवा के साथ-साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता को भी बढ़ाना चाहती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कदम से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा क्योंकि अधिक योग्य नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध होगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधारों और नियुक्तियों की तैयारी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में 80 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया अगले महीने से शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अगले एक वर्ष के भीतर राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार देखने को मिलेंगे और आने वाले वर्षों में रोजगार के कई नए अवसर सृजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में उच्च तकनीक लाने पर तेजी से काम कर रही है। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम और उन्नत एमआरआई मशीनें स्थापित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हिमाचल के नागरिकों को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सुविधाएं राज्य के भीतर ही प्राप्त हों।

आउटसोर्स नियुक्तियों की समाप्ति और नए पदों का सृजन
मुख्यमंत्री ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार आउटसोर्स आधार पर नियुक्तियों को समाप्त करना चाहती है, क्योंकि इस प्रणाली में अक्सर युवाओं का शोषण होता है। युवाओं को रोजगार के बेहतर और सुरक्षित अवसर प्रदान करने के लिए सरकार ने नियमित स्टाफ नर्स पदों के साथ-साथ ‘सहायक स्टाफ नर्स’ के नए पद सृजित करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, नर्सों की भर्ती बैच-वाइज आधार पर भी की जा रही है ताकि अनुभवी और योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।

रोजगार के संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने एक ‘ओवरसीज रिक्रूटमेंट डिपार्टमेंट’ (विदेशी भर्ती विभाग) की स्थापना की है। यह विभाग उन युवाओं का पूरा रिकॉर्ड और ट्रैक रखेगा जो रोजगार के लिए विदेश जाते हैं, ताकि उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

महिलाओं की उपलब्धियों और सशक्तिकरण पर जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश की बेटियों ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण आंकड़े का उल्लेख करते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज संस्थानों में निर्वाचित प्रतिनिधियों में 57.5 प्रतिशत महिलाएं हैं। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि यह आंकड़ा महिला सशक्तिकरण की दिशा में हिमाचल की प्रगति का प्रमाण है।

राजस्व घाटा अनुदान और आर्थिक चुनौतियां
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की। उन्होंने 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद किए जाने पर गंभीर चिंता जताई। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को 1952 से यह अनुदान मिल रहा था, जो उन राज्यों के लिए आवश्यक होता है जहां आय और व्यय के बीच बड़ा अंतर होता है।

उन्होंने बताया कि यदि किसी राज्य के बजट में हर साल 10,000 करोड़ रुपये की कटौती की जाती है, तो राज्य के विकास पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हालांकि कुछ नेता यह तर्क दे रहे हैं कि 17 राज्यों ने यह अनुदान खो दिया है, लेकिन हिमाचल की स्थिति अन्य राज्यों से भिन्न है क्योंकि हिमाचल मुख्य रूप से जल संसाधनों और वनों पर निर्भर है और यहां उद्योगों से अधिक लाभ नहीं मिलता है।

जीएसटी और बिजली परियोजनाओं में रॉयल्टी की मांग
जीएसटी प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या कम है और जीएसटी खरीद पर लगाया जाता है, इसलिए इसका लाभ अक्सर बड़े राज्यों को मिलता है, भले ही उत्पाद हिमाचल में निर्मित हुए हों। इसके कारण राज्य का कर संग्रह 4,000 करोड़ रुपये से घटकर मात्र 150 करोड़ रुपये रह गया है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में मांग की कि हिमाचल प्रदेश को बिजली परियोजनाओं से 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए, ताकि राज्य के लोगों को उनके संसाधनों का सही और उचित हिस्सा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने नर्सिंग स्कॉलर सोसाइटी की सराहना करते हुए उनके कार्यों के लिए 5 लाख रुपये के अनुदान की घोषणा भी की। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनार्था, स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, चिकित्सा शिक्षा निदेशक राकेश शर्मा, स्वास्थ्य सेवा निदेशक गोपाल बेरी और स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उन महिलाओं को भी सम्मानित किया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर समाज के सामने मिसाल पेश की है।

 

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