चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सदन में गुरुवार को वैश्विक परिस्थितियों और केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। पश्चिमी एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण देश में उत्पन्न हुए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस के संकट को आधार बनाकर पंजाब सरकार ने केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटरूचक्क द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव ने सदन के भीतर केंद्र और राज्य के बीच चल रहे टकराव को एक नया मोड़ दे दिया है।
यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले तीन दिनों के भीतर पंजाब विधानसभा में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ लाया गया यह दूसरा निंदा प्रस्ताव है। इससे पूर्व, बीते मंगलवार को सदन में अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक समझौते (ट्रेड एग्रीमेंट) के विरोध में सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था। अब ईंधन और गैस की कमी को लेकर लाए गए इस नए प्रस्ताव ने दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच चल रही कड़वाहट को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
किसानों और गेहूं खरीद पर संकट की चेतावनी
निंदा प्रस्ताव को सदन के समक्ष रखते हुए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटरूचक्क ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की विफल विदेश नीति के कारण आज देश के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। मंत्री ने पंजाब की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में गेहूं की खरीद का महत्वपूर्ण सीजन अब सिर पर है। पंजाब भारत का अन्नदाता है और कटाई के समय पेट्रोल तथा डीजल की भारी मांग होती है। यदि ईंधन की कमी इसी तरह बनी रही, तो इसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव गेहूं की खरीद और उठान पर पड़ेगा।
लाल चंद कटरूचक्क ने रसद और भंडारण की समस्या की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्तमान में पंजाब के सरकारी गोदाम पहले से ही अनाज से भरे हुए हैं। ईंधन की कमी के कारण अनाज की ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) का काम सुस्त पड़ गया है। ऐसी स्थिति में, यदि मंडियों में आने वाली नई फसल का समय पर उठान नहीं हुआ, तो किसानों की उपज रखने के लिए जगह नहीं बचेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की लापरवाही के कारण पंजाब का किसान और कृषि क्षेत्र एक बड़े आर्थिक संकट की ओर धकेला जा रहा है।
खाद संयंत्रों की बंदी और भेदभाव के आरोप
इस चर्चा में भाग लेते हुए कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने गैस संकट के औद्योगिक और कृषि प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में आई भारी कमी के कारण पंजाब के नंगल और बठिंडा स्थित महत्वपूर्ण सीएफएल (खाद) संयंत्रों में उत्पादन ठप हो गया है। इन प्लांटों के बंद होने से राज्य में यूरिया खाद की भारी किल्लत पैदा हो जाएगी, जो आने वाले समय में किसानों के लिए मुसीबत बनेगी।
हरजोत बैंस ने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार करने का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने सदन में दावा किया कि एक तरफ पंजाब के खाद संयंत्रों को गैस की आपूर्ति नहीं दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य हरियाणा के पानीपत स्थित यूनिट को गैस की पूरी सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने इसे केंद्र का क्षेत्रीय पक्षपात करार दिया। मंत्री ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें पहले ही आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रही हैं और अब व्यावसायिक सप्लाई (कॉमर्शियल गैस) को भी रोक दिया गया है। महानगरों के पेट्रोल पंपों पर तेल के लिए लगी लंबी कतारें केंद्र के उन दावों की पोल खोल रही हैं, जिनमें कहा गया था कि युद्ध का भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विदेश नीति और नेतृत्व पर तीखे सवाल
पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार के नेतृत्व पर ही सवालिया निशान लगा दिए। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति पूरी तरह से विफल साबित हुई है। हरपाल चीमा ने तंज कसते हुए स्पीकर से पूछा कि वर्तमान में देश का शासन नरेंद्र मोदी चला रहे हैं या फिर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। उन्होंने इस संदर्भ में एक पुरानी घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हुई थी, तब युद्ध रुकने या शांति की पहली जानकारी डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए दी थी।
हरपाल चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के हितों को सुरक्षित रख पा रही है और न ही घरेलू स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान कर रही है। उन्होंने इस विषय को अत्यंत गंभीर बताते हुए स्पीकर से मांग की कि इस निंदा प्रस्ताव पर सदन में विस्तृत चर्चा और बहस होनी चाहिए। वित्तमंत्री की इस मांग को स्वीकार करते हुए स्पीकर ने गुरुवार को इस मुद्दे पर विशेष बहस का समय निर्धारित कर दिया है।
विधानसभा के गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यदि गुरुवार को यह प्रस्ताव सदन में पारित हो जाता है, तो यह पंजाब के संसदीय इतिहास में संभवतः पहला मौका होगा जब मात्र तीन दिनों के अंतराल में केंद्र सरकार के खिलाफ दो अलग-अलग निंदा प्रस्ताव पास किए जाएंगे। यह घटनाक्रम न केवल केंद्र-राज्य संबंधों में आई गिरावट को दर्शाता है, बल्कि आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में एक बड़े टकराव का संकेत भी दे रहा है। पूरा विपक्ष और सत्तापक्ष अब इस बहस के जरिए केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है।