US: अमेरिका का फैसला, सुरक्षित भंडार से निकलेगा 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल

नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और वैश्विक स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से नागरिकों को राहत दिलाने के लिए अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने गुरुवार को अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) से 172 मिलियन बैरल तेल निकालने की आधिकारिक घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

डोनल्ड ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक और ऊर्जा संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस बड़े फैसले की पुष्टि करते हुए संकेत दिया कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है। डोनल्ड ट्रंप ने ओहियो के एक स्थानीय टीवी चैनल ‘लोकल 12’ को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा कि तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए रणनीतिक भंडार का उपयोग करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वे इस भंडार से तेल की निकासी करेंगे ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़े और कीमतें नीचे आएं। डोनल्ड ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन पंपों पर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित है और जनता को फौरी राहत देना चाहता है।

युद्ध की पृष्ठभूमि और तेल आपूर्ति पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए हमलों के बाद देखा गया है। अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित तेल बुनियादी ढांचों और महत्वपूर्ण तेल ठिकानों पर हमले किए। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के मालवाहक जहाजों व तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया। इन सैन्य गतिविधियों के कारण खाड़ी के समुद्री रास्तों से होने वाली तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भावों पर पड़ा है।

वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयास और आईईए की भूमिका
अमेरिका का यह फैसला केवल एक देश तक सीमित नहीं है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के 32 सदस्य देशों ने मिलकर एक ऐतिहासिक और रिकॉर्ड रिलीज का ऐलान किया है। आईईए के सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से कुल 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। यह अब तक का सबसे बड़ा समन्वित प्रयास माना जा रहा है। इस 400 मिलियन बैरल में से सबसे बड़ा हिस्सा 172 मिलियन बैरल अकेले अमेरिका अपने भंडार से निकालेगा। अमेरिका के अलावा जापान और कई यूरोपीय देशों ने भी अपने-अपने आरक्षित भंडार से तेल निकालकर आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है।

बाजार में अनिश्चितता और होर्मुज जलडमरूमध्य का डर
हैरानी की बात यह है कि आईईए और अमेरिका द्वारा इतने बड़े पैमाने पर तेल रिलीज करने की घोषणा के बावजूद वैश्विक बाजार शांत नहीं हुआ है। घोषणा के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बजाय चार प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार के विशेषज्ञों और निवेशकों का मानना है कि तेल की यह निकासी केवल कुछ समय के लिए राहत दे सकती है, लेकिन यदि ईरान के साथ संघर्ष लंबा खिंचता है, तो स्थिति और खराब हो सकती है। निवेशकों में सबसे बड़ा डर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के बंद होने को लेकर है, जहां से दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यह मार्ग युद्ध के कारण पूरी तरह बंद हो जाता है, तो आपूर्ति का संकट और गहरा जाएगा।

अमेरिका के भीतर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वहां पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 3.58 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी है। पिछले लगातार 11 दिनों से कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है, जिसने अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है।

निकासी की समयसीमा और क्रिस राइट का आश्वासन
अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, रणनीतिक भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल निकालने की प्रक्रिया अगले सप्ताह से विधिवत शुरू हो जाएगी। इस पूरी मात्रा को करीब 120 दिनों यानी अगले चार महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम विश्व बाजार को तब तक आवश्यक राहत प्रदान करेगा जब तक कि होर्मुज जलडमरूमध्य का मार्ग जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता।

क्रिस राइट ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार ने भविष्य की योजना भी तैयार कर ली है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक भंडार से अभी जो तेल निकाल रहा है, उसे बाद में फिर से भरा जाएगा। योजना के अनुसार, करीब 200 मिलियन बैरल नया तेल खरीदकर रिजर्व को और अधिक मजबूत किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस पूरी प्रक्रिया में करदाताओं (टैक्सपेयर्स) का एक भी पैसा खर्च नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे रणनीतिक बाजार प्रबंधन के जरिए पूरा किया जाएगा।

अमेरिका और आईईए की इस संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य तेल उत्पादक देशों और विशेष रूप से ईरान के प्रभुत्व को चुनौती देना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाना है। हालांकि, युद्ध की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 172 मिलियन बैरल तेल की यह अतिरिक्त खेप कीमतों को कितना और कब तक नीचे ला पाती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र और वाशिंगटन के ऊर्जा मुख्यालयों पर टिकी हैं।

 

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