Punjab: पंजाब विधानसभा में भारी हंगामा हरपाल सिंह चीमा और सुखपाल सिंह खैहरा के बीच तीखी नोकझोंक के बाद कार्यवाही स्थगित

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तल्खी आज अपने चरम पर पहुंच गई। बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही ‘शून्य काल’ पूरी तरह से हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन के भीतर का वातावरण उस समय अत्यंत तनावपूर्ण हो गया जब वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई। इस विवाद के कारण सदन में न केवल मर्यादित चर्चा का अभाव दिखा, बल्कि व्यक्तिगत आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर भी चला, जिसके परिणामस्वरूप स्पीकर को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

विवाद की जड़ और वित्त मंत्री के कड़े तेवर
सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक अत्यंत गंभीर मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा पर निशाना साधा। चीमा ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सुखपाल सिंह खैहरा ने उनके विरुद्ध बेहद आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खैहरा ने उन्हें ‘बंधुआ मजदूर’ कहकर संबोधित किया है, जो न केवल उनके पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में भी अत्यंत अपमानजनक है।

हरपाल सिंह चीमा ने सदन में कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की कि सुखपाल सिंह खैहरा को अपनी इस टिप्पणी के लिए सदन के भीतर बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि खैहरा माफी नहीं मांगते हैं, तो उनकी विधानसभा सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाना चाहिए। चीमा ने खैहरा के राजनीतिक इतिहास पर भी प्रहार किया और कहा कि खैहरा जिस भी राजनीतिक दल में रहे हैं, उन्होंने वहां के वातावरण को केवल खराब करने का काम किया है।

व्यक्तिगत हमलों से गरमाया सदन का माहौल
मामला केवल ‘बंधुआ मजदूर’ वाली टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। सत्ता पक्ष के अन्य विधायकों ने भी इस विवाद में कूदते हुए सुखपाल सिंह खैहरा पर चौतरफा हमले शुरू कर दिए। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने खैहरा की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनकी डिग्रियां जाली हैं। इतना ही नहीं, सत्ता पक्ष की ओर से खैहरा की मानसिक स्थिति को लेकर भी विवादित टिप्पणियां की गईं। विधायकों ने यहां तक कह दिया कि खैहरा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उन्हें उचित ‘इलाज’ की आवश्यकता है। इन व्यक्तिगत हमलों के कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और गरिमापूर्ण चर्चा की जगह हंगामे ने ले ली।

विपक्ष का बचाव और निंदा प्रस्ताव पर रार
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने अपनी पार्टी के विधायक सुखपाल सिंह खैहरा का मजबूती से बचाव किया। बाजवा ने सदन में व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले दिन भी यही गुजारिश की थी कि पहले सदस्य का पक्ष सुना जाए।

इसी गहमागहमी के बीच प्रताप सिंह बाजवा ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करने की कोशिश की। हालांकि, विधानसभा स्पीकर ने बाजवा के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। स्पीकर ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष का यह निंदा प्रस्ताव केवल अपने सदस्य को बचाने के लिए एक ढाल (शील्ड) की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आधार पर निंदा प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा सकती।

महिला विधायकों का प्रदर्शन और सदन का स्थगन
हंगामा उस समय अनियंत्रित हो गया जब आम आदमी पार्टी की सभी महिला विधायक अपनी सीटों से उठकर सदन के बीचों-बीच यानी वेल में आ गईं। महिला विधायकों ने सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही चलाना असंभव हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते शोर और अव्यवस्था को देखते हुए स्पीकर ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन जब मामला शांत नहीं हुआ तो उन्होंने सदन की कार्यवाही को 20 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।

आज के इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में मुद्दों पर चर्चा से अधिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हावी है। सदन के भीतर जिस तरह की भाषा और व्यक्तिगत आक्षेपों का प्रयोग देखा गया, उसने संसदीय मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता पक्ष जहां खैहरा की माफी पर अड़ा हुआ है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता की तानाशाही बताकर अपने सदस्य के साथ खड़ा नजर आ रहा है। सदन के भीतर की यह कड़वाहट आने वाले दिनों में और बढ़ने के आसार हैं, जिससे बजट सत्र के महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।

 

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