नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की आज से शुरू होने वाली भारत यात्रा से पहले ओटावा के कूटनीतिक रुख में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच जारी कड़वाहट और गंभीर आरोपों के दौर को पीछे छोड़ते हुए, अब कनाडाई अधिकारी भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी को फिर से पटरी पर लाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस यात्रा को भारत-कनाडा संबंधों को नई दिशा देने के एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
कनाडा के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि नई दिल्ली के साथ अब ‘परिपक्व और ठोस’ चर्चा का आधार तैयार हो चुका है। कार्नी की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक दूरियों को कम करना और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूती प्रदान करना है। एक कनाडाई अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि ओटावा को लगता कि भारत कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है, तो प्रधानमंत्री की यह यात्रा संभव ही नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का विदेशी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करता और वर्तमान में स्थिति बातचीत के लिए अनुकूल है।
विशेष रूप से, टोरंटो स्टार की एक रिपोर्ट में कनाडाई अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों का भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। यह बयान उन आरोपों के विपरीत है जो पूर्व में दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बने थे। अब कनाडाई सरकार व्यवस्थित रूप से मंत्री और नेता स्तर पर भारत की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ सार्थक संवाद करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का मानना है कि भविष्य की चर्चाओं के लिए अब एक ठोस और सकारात्मक जमीन तैयार है।
मार्क कार्नी की यह यात्रा उनके हिंद-प्रशांत क्षेत्र के व्यापक दौरे का हिस्सा है। इस दौरे के जरिए कनाडा भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को गहरा करने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान में भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा वस्तु एवं सेवा व्यापार भागीदार है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। व्यापारिक सुगमता और आर्थिक निवेश इस यात्रा के केंद्र में रहने वाले हैं।
भारत दौरे के दौरान मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली वार्ताओं पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। कनाडाई सरकार अब व्यापारिक हितों को कूटनीतिक विवादों से ऊपर रखकर संबंधों को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रही है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।