Rajasthan: राजस्थान में दो बच्चों की चुनावी पाबंदी खत्म – The Hill News

Rajasthan: राजस्थान में दो बच्चों की चुनावी पाबंदी खत्म

जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश की स्थानीय राजनीति के ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों के लिए दशकों पुरानी ‘दो बच्चों की नीति’ को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय के साथ ही राजस्थान में अब उन लोगों के लिए भी चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है, जिनके दो से अधिक बच्चे हैं।

सरकार के इस अहम फैसले की जानकारी देते हुए कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 और राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2026 के प्रारूप को स्वीकार कर लिया है। इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्य विधानसभा के इसी सत्र में पारित करने की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में यह पाबंदी कई साल पहले तत्कालीन शेखावत सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के एक बड़े कदम के रूप में लागू की गई थी। उस समय सरकार का मानना था कि जन प्रतिनिधियों को समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे आम जनता भी छोटे परिवार के महत्व को समझे।

जोगाराम पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले दशकों में प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में व्यापक परिवर्तन आए हैं, जिसके चलते यह प्रावधान अब पुराना और अप्रासंगिक हो गया था। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र के सबसे निचले स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस तरह की कानूनी अड़चनों को हटाना अनिवार्य है। इस प्रतिबंध के हटने से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। कई ऐसे प्रभावी नेता और जमीनी कार्यकर्ता, जो केवल बच्चों की संख्या के कारण अयोग्य घोषित कर दिए गए थे, अब मुख्यधारा की राजनीति में वापसी कर सकेंगे। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के कई स्थानीय नेता इस नियम की वजह से चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे।

स्थानीय निकायों में दो बच्चों की शर्त को लेकर विधानसभा में वर्षों से बहस चल रही थी। कांग्रेस नेता हेमराम चौधरी और भाजपा नेता चंद्रभान सिंह अक्या जैसे कई वरिष्ठ विधायकों ने इस मुद्दे को बार-बार सदन में उठाया था। उनकी मुख्य दलील यह थी कि जब सांसद और विधायक बनने के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं है, तो केवल पंचायत और नगरपालिका स्तर के जनप्रतिनिधियों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है। अब सरकार के इस कदम से यह कानूनी विसंगति दूर हो जाएगी और जमीनी स्तर पर चुनावी प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र होगी।

चुनाव संबंधी बदलावों के अलावा, कैबिनेट ने जयपुर के विकास के लिए भी एक बड़ी परियोजना को हरी झंडी दी है। दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ की भव्यता को देखते हुए अब जयपुर में भी 5800 करोड़ रुपये की भारी लागत से ‘राजस्थान मंडपम’ बनाया जाएगा। यह मंडपम अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और सम्मेलनों के लिए एक आधुनिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इन फैसलों के माध्यम से भजनलाल सरकार ने न केवल स्थानीय चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है, बल्कि प्रदेश के बुनियादी ढांचे के विस्तार का भी बड़ा संदेश दिया है।

 

Pls reaD:Rajasthan: भिवाड़ी की केमिकल फैक्ट्री में जोरदार धमाके से सात मजदूरों की जलकर मौत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *