नई दिल्ली। देश की सत्ता के केंद्र का पता आज से हमेशा के लिए बदलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 13 फरवरी को साउथ ब्लॉक से निकलकर अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होंगे। दारा शिकोह रोड पर नवनिर्मित यह भव्य और आधुनिक परिसर 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी आज शाम एक गरिमामय समारोह में इस नई इमारत ‘सेवा तीर्थ’ और इसके साथ ही ‘कर्तव्य भवन’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही देश के इतिहास का एक नया अध्याय शुरू होगा।
‘सेवा तीर्थ’ को प्रधानमंत्री के कामकाज और सुरक्षा को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 1,189 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अत्याधुनिक परिसर में तीन मुख्य इमारतें हैं। पहली इमारत में प्रधानमंत्री का कार्यालय (PMO) होगा, जबकि दूसरी इमारत में कैबिनेट सचिवालय और तीसरी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कार्यालय होंगे। इन सभी महत्वपूर्ण विभागों का एक ही परिसर में होना प्रधानमंत्री के लिए कैबिनेट बैठकें आयोजित करने और नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया को काफी तेज और आसान बना देगा। अब तक ये सभी कार्यालय राजधानी में अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे।
नए प्रधानमंत्री कार्यालय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तकनीक और सुरक्षा है। सेवा तीर्थ पूरी तरह से हाईटेक सुविधाओं से सुसज्जित है। यहाँ हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ-साथ पेपरलेस वर्क कल्चर को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल आर्काइव्स की व्यवस्था की गई है। सम्मेलन और बैठकों के लिए तकनीकी रूप से सुन्नत कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और एडवांस मॉनिटरिंग नेटवर्क लगाया गया है। यह परिसर विजय चौक के पास स्थित है, जिससे प्रधानमंत्री के काफिले की आवाजाही के दौरान आम जनता को होने वाली ट्रैफिक की समस्याओं से भी बड़ी राहत मिलेगी।
आज का दिन ऐतिहासिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 80 वर्षों से सत्ता का केंद्र रहा साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय आज अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक का साक्षी बनेगा। भारत की आजादी के दिन, 15 अगस्त 1947 को इसी भवन में देश की पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। आज, 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक होगी। इस बैठक के समाप्त होते ही प्रधानमंत्री कार्यालय की सभी गतिविधियां ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो जाएंगी। यह नया परिसर न केवल आधुनिक भारत की कार्यक्षमता का प्रतीक होगा, बल्कि सुशासन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर भी साबित होगा।
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