शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पहले राज्य सरकार और सत्ताधारी संगठन में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती है। इसके साथ ही लंबे समय से खाली पड़े बोर्ड और निगमों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों पर भी नई नियुक्तियों की तैयारी है। इन महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दिल्ली में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ मैराथन बैठकें की हैं।
इस सिलसिले में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने दिल्ली प्रवास के दौरान कांग्रेस प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सरकार और संगठन के बीच तालमेल बिठाना और उन चेहरों को आगे लाना है जो आने वाले समय में पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकें। वर्तमान में राज्य मंत्रिमंडल में एक पद खाली है, जिसे भरने के लिए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को खंगाला जा रहा है।
मंत्रिमंडल की इस दौड़ में कांगड़ा जिला से विधायक संजय रत्न और आशीष बुटेल के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। वहीं, कुल्लू जिला से सुंदर ठाकुर भी मंत्री पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। कुल्लू जिला की बात करें तो वर्तमान में वहां से मंत्रिमंडल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिसके चलते सुंदर ठाकुर का दावा काफी मजबूत नजर आता है। इसके अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी भरा जाना है। संभावना जताई जा रही है कि रेस में शामिल नेताओं में से किसी एक को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी, जबकि दूसरे को विधानसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
राज्य सरकार अपनी सत्ता के तीन वर्ष पूरे कर चुकी है और अब कार्यकाल में दो साल से भी कम का समय बचा है। ऐसे में सरकार के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण है। सरकार की कोशिश है कि अंतिम दो वर्षों में विकास कार्यों में नई ऊर्जा फूंकी जाए। हालांकि किसी मौजूदा मंत्री को हटाने की संभावनाएं फिलहाल कम हैं, लेकिन प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए मंत्रियों के विभागों में बड़े पैमाने पर फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री स्वयं शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभागों की समीक्षा कर रहे हैं और उनके द्वारा निर्धारित सात लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सक्षम टीम की तलाश में हैं।
केवल सरकार ही नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन के भीतर भी भारी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति के डेढ़ महीने बाद भी राज्य कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। वर्तमान में केवल जिला अध्यक्षों की तैनाती हो सकी है, जबकि ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं। दिल्ली में हुई बैठकों में पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) के गठन पर भी विस्तृत चर्चा हुई है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी पंचायत चुनावों से पहले संगठन की पूरी टीम तैयार हो जाए ताकि चुनावी मैदान में मजबूती से उतरा जा सके।
शिमला और किन्नौर जैसे जिलों में जिला अध्यक्षों के मसले पर भी आलाकमान के साथ विचार-विमर्श किया गया है। सरकार की मंशा है कि शेष कार्यकाल में जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाए। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार अब क्षेत्रीय असंतुलन को दूर कर हर जिला को उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में बढ़ रही है। बजट सत्र से ठीक पहले होने वाले ये बदलाव हिमाचल की राजनीति की अगली दिशा तय करेंगे।
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