नई दिल्ली।
कांग्रेस पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से चल रही खींचतान और मतभेदों की खबरों के बीच एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संसद भवन में मुलाकात की है। यह बैठक लगभग आधे घंटे तक चली, जिसे आगामी चुनावों से पहले पार्टी की आंतरिक कलह को शांत करने की कवायद माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर ने खुद मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा था। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य अपनी चिंताओं और विचारों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने स्पष्ट रूप से रखना था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की नाराजगी को दूर करना चाहता है ताकि पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतर सके। थरूर और खरगे की इस बातचीत को इसी सामंजस्य बैठाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
शशि थरूर और कांग्रेस के बीच संबंधों में कड़वाहट की शुरुआत पिछले साल अप्रैल में हुई थी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद थरूर ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकट प्रबंधन की तारीफ की थी, वह कांग्रेस के कई नेताओं को नागवार गुजरी। थरूर द्वारा प्रधानमंत्री के रुख की सराहना किए जाने पर पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। उस दौरान कांग्रेस के कई नेताओं ने थरूर पर कटाक्ष करते हुए यहां तक कह दिया था कि वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए न्योता पाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना के बाद से ही थरूर और पार्टी के अन्य नेताओं के बीच दूरियां बढ़ती नजर आने लगी थीं।
विवाद का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। नवंबर 2025 में दो ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने इन दूरियों को और ज्यादा स्पष्ट कर दिया। पहली घटना तब हुई जब शशि थरूर एक निजी कार्यक्रम में शामिल हुए जहां प्रधानमंत्री भाषण दे रहे थे। उस भाषण को सुनने के बाद थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी राय साझा की। उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन को आर्थिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक परिवर्तन का एक बड़ा आह्वान बताया, जो देश को प्रगति के लिए प्रेरित करता है। थरूर की इस टिप्पणी पर पार्टी के भीतर ही भारी विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और संदीप दीक्षित ने थरूर के विचारों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री के भाषण को पूरी तरह से बकवास करार दिया था।
इसके तुरंत बाद विवाद तब और बढ़ गया जब थरूर का एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक ‘इंडियन पॉलिटिक्स आर ए फैमिली बिजनेस’ था। इस लेख में उन्होंने कांग्रेस जैसी उन पार्टियों की कड़ी आलोचना की थी जो परिवार आधारित राजनीति पर टिकी हुई हैं। थरूर का यह रुख सीधे तौर पर कांग्रेस की कार्यशैली और नेतृत्व पर प्रहार माना गया, जिससे पार्टी आलाकमान में काफी नाराजगी देखी गई। इन्हीं तमाम विवादों और शिकायतों की पृष्ठभूमि में अब मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुई यह बैठक काफी मायने रखती है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के जरिए थरूर ने उन तमाम मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है जिनके कारण पार्टी में उनके प्रति अविश्वास का माहौल बना हुआ था। अब देखना यह होगा कि इस बैठक के बाद कांग्रेस के भीतर थरूर की भूमिका और पार्टी की एकजुटता में क्या बदलाव आता है।
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