लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव के बीच उपजे पारिवारिक विवाद ने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को प्रतीक यादव के इंस्टाग्राम अकाउंट से की गई दो विस्फोटक पोस्ट के बाद मंगलवार को इस मामले में कोई नई जानकारी सामने नहीं आई। प्रतीक ने अपनी पोस्ट में अपर्णा यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘पारिवारिक रिश्ते तोड़ने वाली महिला’ और ‘स्वार्थी’ करार दिया था, लेकिन मंगलवार को उन्होंने इस मुद्दे पर कोई नई टिप्पणी नहीं की। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने भी इन व्यक्तिगत आरोपों पर अपनी चुप्पी बनाए रखी है।
प्रतीक यादव, जो एक बड़े राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद हमेशा सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं, उनके सोशल मीडिया हैंडल से आई इन पोस्ट ने हर किसी को चौंका दिया। प्रतीक ने अपनी पहली पोस्ट में ‘ए फैमिली डेस्ट्रायर’ कैप्शन के साथ अपर्णा की फोटो साझा की और जल्द से जल्द उनसे तलाक लेने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि अपर्णा की वजह से उनके परिवार के सदस्यों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। अपनी दूसरी पोस्ट में प्रतीक ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में अपर्णा से बड़ा ‘झूठा और स्वार्थी’ व्यक्ति नहीं देखा। उन्होंने अपने बच्चे की कसम खाते हुए दावा किया कि अपर्णा ने उनके माता, पिता और भाई के साथ रिश्तों को खराब करने का काम किया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अपर्णा यादव की चुप्पी को उनके राजनीतिक और प्रशासनिक धैर्य के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने इन आरोपों का सीधे तौर पर कोई खंडन या जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने मंगलवार शाम को भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की तस्वीर साझा कर उन्हें बधाई दी। इस कदम को जानकारों द्वारा एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वे यह जताना चाहती हैं कि वे अपने राजनीतिक दायित्वों के प्रति पूरी तरह सक्रिय हैं। अपर्णा यादव वर्ष 2022 में भाजपा में शामिल हुई थीं और वर्तमान में वे महिला आयोग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
विवाद के बीच एक चर्चा यह भी उठी कि प्रतीक यादव का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया है। परिवार के कुछ करीबी सूत्रों ने इस ओर संकेत भी दिया, लेकिन मंगलवार देर शाम तक इस संबंध में न तो कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई और न ही विवादित पोस्ट को अकाउंट से हटाया गया। प्रतीक के अकाउंट पर वे दोनों पोस्ट अब भी मौजूद हैं, जिन्हें हजारों लोग लाइक कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर आम जनता भी इस विवाद को लेकर दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। कुछ यूजर्स प्रतीक को राजनीति में आने और मैनपुरी से चुनाव लड़ने की सलाह दे रहे हैं, तो कुछ उन्हें अपना घर बचाने और मामले को शांति से सुलझाने की नसीहत दे रहे हैं।
मंगलवार को राजधानी लखनऊ में अपर्णा यादव के आवास और कार्यालय दोनों ही जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा। बताया गया कि अपर्णा राज्य से बाहर थीं और वे अपने कार्यालय भी नहीं पहुंचीं। उनके स्टाफ और सहयोगियों की ओर से भी इस पारिवारिक कलह पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है। प्रतीक और अपर्णा के रिश्तों में आई इस कड़वाहट ने यादव परिवार के भीतर की अंदरूनी कलह को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह जोड़ा अपने मतभेदों को सुलझा पाता है या यह कानूनी अलगाव की ओर बढ़ेगा। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश की सियासत में व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के बीच के संघर्ष को चर्चा का मुख्य विषय बना दिया है।
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