Himachal: युवाओं को नशे से बचाने के लिए हिमाचल सरकार की नई पहल और मंडी से हुआ अभियान का आगाज

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज राजधानी शिमला से एनएसयूआई जिला मंडी के ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ (नशा मुक्त परिसर) अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य स्कूल और कॉलेज परिसरों में युवाओं को नशे, विशेष रूप से ‘चिट्टा’ के घातक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। सरकार और एनएसयूआई का यह साझा प्रयास युवाओं को नशे के जाल से निकालकर उन्हें शिक्षा, खेल और अन्य सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ने के लिए तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस अवसर पर कहा कि एनएसयूआई मंडी द्वारा शुरू किया गया यह ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ अभियान राज्य सरकार के नशा मुक्त हिमाचल के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अभियान सरकार द्वारा नशे, विशेषकर चिट्टा के विरुद्ध चलाई जा रही मौजूदा मुहिम को नई गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को नशे की लत से दूर रखने के लिए इस तरह के व्यापक जन जागरूकता अभियानों की वर्तमान समय में अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब छात्र स्वयं इस लड़ाई का हिस्सा बनेंगे, तभी समाज से इस बुराई का जड़ से खात्मा संभव होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए वे हर संभव कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

एनएसयूआई जिला मंडी के अध्यक्ष अनित जसवाल ने इस अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह पूरी मुहिम मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के ‘एंटी-चिट्टा’ अभियान से प्रेरित है। इसका प्राथमिक उद्देश्य शिक्षण संस्थानों के वातावरण को पूरी तरह सुरक्षित और नशा मुक्त बनाना है। उन्होंने जानकारी दी कि इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के रचनात्मक और सूचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें छात्रों के लिए विशेष जागरूकता सत्र, नशे के विरुद्ध शपथ ग्रहण समारोह, ‘एंटी-चिट्टा वॉकथॉन’ (पैदल यात्रा) और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन शामिल है। खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को सही और स्वास्थ्यवर्धक दिशा में लगाने का प्रयास किया जाएगा ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें।

अभियान की समयसीमा और कार्यान्वयन योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए अनित जसवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम 23 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इसे दो चरणों में व्यवस्थित तरीके से लागू करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में कार्यक्रमों का आयोजन स्कूल स्तर पर किया जाएगा, ताकि किशोर उम्र के छात्रों को प्रारंभिक स्तर पर ही नशे के खतरों के प्रति सचेत किया जा सके। इसके पश्चात, दूसरे चरण में कॉलेजों में बड़ी गतिविधियों का संचालन होगा, जहाँ युवाओं को इस लड़ाई में नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजनाबद्ध तरीके से मंडी जिले के अधिक से अधिक शिक्षण संस्थानों और हजारों छात्रों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है।

इस उद्घाटन समारोह के दौरान शिमला में मुख्यमंत्री के साथ विधायक संजय अवस्थी और विधायक राकेश कालिया भी उपस्थित रहे। इन नेताओं ने भी नशा मुक्ति की दिशा में युवाओं की इस सक्रिय भागीदारी का पुरजोर समर्थन किया और इसे प्रदेश के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य कदम बताया। राज्य सरकार का मानना है कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को आर्थिक व मानसिक रूप से बर्बाद कर देता है, इसलिए इसे रोकने के लिए शासन और प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों का साथ आना अनिवार्य है। एनएसयूआई की यह पहल आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण पेश करेगी। मुख्यमंत्री ने अंत में सभी हितधारकों से इस अभियान को सफल बनाने और हिमाचल के भविष्य को उज्ज्वल व सुरक्षित करने की अपील की।

 

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