Uttarakhand: एसटीएफ ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस गिरोह का किया भंडाफोड़ और अंतर्राज्यीय नेटवर्क का सदस्य गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अवैध हथियारों और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने विशेष अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसटीएफ की टीम ने बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उन्हें उत्तराखंड में पंजीकृत कराने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को दबोचा गया है, जिसके पास से न केवल जाली दस्तावेज बल्कि अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं। इस गिरफ्तारी के साथ ही उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड तक फैले एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

यह पूरी कार्रवाई गैंगस्टर और अवैध हथियारों के सौदागरों के विरुद्ध चलाए जा रहे सघन धरपकड़ अभियान के तहत शुक्रवार को अंजाम दी गई। पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे के दिशा-निर्देशों पर इस ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व और पुलिस उपाधीक्षक आर.बी. चमोला के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसे इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रंगे हाथों पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

एसटीएफ को पिछले कुछ समय से गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं कि कुछ अपराधी किस्म के लोग बाहरी राज्यों, विशेषकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करवा रहे हैं। ये लोग इन जाली दस्तावेजों को बड़ी चतुराई से उत्तराखंड की शस्त्र पंजिका में दर्ज कराकर उन्हें वैध दिखाने का प्रयास कर रहे थे। इस सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ ने तकनीकी जांच और फील्ड इंटेलिजेंस का सहारा लिया। जांच के दौरान एक संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस अधिकारियों के राडार पर आया, जिसके रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां पाई गईं।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि गिरोह के सदस्यों ने एक शस्त्र लाइसेंस को पहले सिरसा (हरियाणा) से जारी होना दिखाया था। इसके बाद दस्तावेजों में हेराफेरी कर उसे मेरठ (उत्तर प्रदेश) स्थानांतरित दिखाया गया और अंततः उसे देहरादून के पते पर दर्ज कराने की कोशिश की गई। एसटीएफ की टीम ने जब इस लाइसेंस की सच्चाई जानने के लिए सिरसा जिलाधिकारी कार्यालय से संपर्क किया, तो वहां से प्राप्त जानकारी ने गिरोह के दावों की पोल खोल दी। सिरसा प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय से इस तरह का कोई भी लाइसेंस कभी जारी ही नहीं किया गया था। यह पूरी तरह से एक जाली दस्तावेज था जिसे सिस्टम में सेंध लगाने के लिए तैयार किया गया था।

पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद एसटीएफ ने जाल बिछाया और थाना प्रेमनगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले केहरी गांव में छापेमारी की। यहाँ से मनोज सिंह नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान मनोज सिंह के कब्जे से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस, एक अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए। आरोपी ने प्राथमिक पूछताछ में स्वीकार किया कि वह इस नेटवर्क का हिस्सा है और जाली दस्तावेजों के आधार पर हथियार रखने का शौकीन है।

गिरफ्तारी के बाद मनोज सिंह के खिलाफ थाना प्रेमनगर, देहरादून में धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी और आर्म्स एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। एसटीएफ अब इस मामले की और गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों के फर्जी लाइसेंस बनवाए हैं और इस नेटवर्क में प्रशासन या पुलिस विभाग का कोई व्यक्ति शामिल है या नहीं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अवैध हथियारों की तस्करी और जाली दस्तावेजों के अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। एसटीएफ की इस सतर्कता ने सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी सेंध लगने से बचा लिया है।

 

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