लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्यों में उच्च स्तर की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा और निर्णायक निर्णय लिया है। अब प्रदेश भर में चलने वाली सड़कों, पुलों (सेतु) और सीवर परियोजनाओं के निर्माण कार्यों की ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। इसके लिए देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों और इंजीनियरिंग कॉलेजों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। नियोजन विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत कार्ययोजना और प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही लागू करने की तैयारी है।
प्रशासनिक स्तर पर इस पहल का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों में होने वाली तकनीकी गड़बड़ियों को रोकना और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता को मानक के अनुरूप बनाए रखना है। नियोजन विभाग के इस प्रस्ताव के तहत परियोजनाओं की लागत के आधार पर ऑडिट करने वाले संस्थानों का चयन किया गया है। सरकार का मानना है कि स्वतंत्र संस्थानों द्वारा की जाने वाली जांच से निर्माण एजेंसियों पर दबाव बना रहेगा और जनता के पैसे का सही सदुपयोग सुनिश्चित होगा।
प्रस्ताव के अनुसार, 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं का ऑडिट देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों द्वारा किया जाएगा। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर, आईआईटी-बीएचयू वाराणसी, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी रुड़की जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थानों को शामिल करने की तैयारी है। इन संस्थानों के विशेषज्ञों की टीम समय-समय पर निर्माण स्थल का दौरा कर कार्यों की सूक्ष्मता से जांच करेगी और तकनीकी बारीकियों पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
वहीं, 25 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं के ऑडिट के लिए सरकार ने अन्य प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों को चिन्हित किया है। इस श्रेणी के कार्यों की जांच अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू), मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) प्रयागराज, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर और हरकोर्ट बटलर प्राविधिक संस्थान (एचबीटीआई) कानपुर जैसे संस्थानों द्वारा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 25 करोड़ रुपये तक की लागत वाले छोटे प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों को दी जाएगी।
मुख्य अभियंता नियोजन पवन वर्मा ने इस महत्वपूर्ण योजना की पुष्टि करते हुए बताया कि सड़क, सेतु और सीवर परियोजनाओं की थर्ड पार्टी ऑडिट का खाका पूरी तरह तैयार है। वर्तमान में इस व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए संबंधित संस्थानों और विश्वविद्यालयों के प्रबंधन से चर्चा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को बहुत जल्द अनिवार्य बना दिया जाएगा। इस ऑडिट प्रणाली के माध्यम से निर्माण के दौरान होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर बाहरी विशेषज्ञों की नजर रहेगी, जिससे कार्य की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं हो पाएगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए भी इसी प्रकार की थर्ड पार्टी ऑडिट व्यवस्था लागू की है। उस व्यवस्था के तहत तकनीकी संस्थानों की टीमें निर्माण के दौरान मौके पर जाकर पांच बार अलग-अलग चरणों में जांच करती हैं। भवन निर्माण के क्षेत्र में इस प्रणाली की सफलता और इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए ही अब सरकार ने इसे सड़क, सीवर और सेतु निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी विस्तार देने का फैसला लिया है। सरकार की इस पहल से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक चलने वाले मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण सुनिश्चित हो सकेगा।
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