अमृतसर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान वीरवार को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश हुए। मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भगवंत मान सुबह सवेरे अमृतसर पहुंचे और पूरी विनम्रता के साथ नंगे पांव श्री हरमंदिर साहिब के परिसर में प्रवेश किया। उन्होंने सबसे पहले दरबार साहिब के भीतर जाकर श्रद्धापूर्वक माथा टेका और गुरु चरणों में अपनी आस्था प्रकट की। इसके पश्चात वे जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज के कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पिछले कुछ बयानों को लेकर उपजे विवाद पर अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।
अकाल तख्त साहिब में पेशी के दौरान भगवंत मान का व्यवहार एक सामान्य श्रद्धालु की भांति रहा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वे यहां किसी सत्ता के मद में या मुख्यमंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि एक सामान्य सिख के रूप में अपनी भूलों की क्षमा याचना और पक्ष रखने आए हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद नंगे पैर चलकर गुरु घर पहुंचना उनकी धार्मिक मर्यादा के प्रति समर्पण को दर्शाता है। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज के साथ हुई इस मुलाकात के दौरान मान ने उन सभी बिंदुओं पर विस्तार से बात की जिन्हें लेकर सिख पंथ और धार्मिक संस्थाओं में नाराजगी देखी जा रही थी।
मुलाकात के बाद मीडिया और संगत को संबोधित करते हुए भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने अपना लिखित स्पष्टीकरण जत्थेदार साहिब को सौंप दिया है। उन्होंने उन तमाम आरोपों और धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि वे श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती दे रहे हैं। मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी नीयत कभी भी ऐसी नहीं रही है कि वे सिखों की इस महान संस्था के सम्मान को किसी भी प्रकार की ठेस पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि उनके मन में अकाल तख्त साहिब के प्रति अटूट श्रद्धा है और वे इसकी मर्यादा को सर्वोपरि मानते हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि समाज के कुछ वर्गों द्वारा उनके प्रति एक गलत धारणा बनाई जा रही थी, जिसे दूर करना अनिवार्य था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे गुरु के सेवक हैं और धार्मिक परंपराओं का पालन करना उनकी प्राथमिकता है। स्पष्टीकरण सौंपने के बाद अब गेंद सिंह साहिबान के पाले में है। मान ने कहा कि जत्थेदार साहिब और अन्य विद्वान उनके द्वारा दिए गए तथ्यों और स्पष्टीकरण की समीक्षा करेंगे। समीक्षा के उपरांत सिंह साहिब जो भी फैसला सुनाएंगे, वे उसे पूरी विनम्रता और श्रद्धा के साथ स्वीकार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संस्था का जो भी आदेश होगा, वह उनके लिए अंतिम होगा और वे उसमें किसी भी प्रकार का तर्क-वितर्क नहीं करेंगे।
भगवंत मान की इस पेशी को लेकर काफी समय से चर्चाओं का बाजार गर्म था। उनके कुछ पुराने बयानों को धार्मिक मर्यादा के विपरीत माना गया था, जिसके बाद उन्हें तलब किया गया था। वीरवार को हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि वे अपनी धार्मिक जवाबदेही से पीछे हटने वाले नहीं हैं। दरबार साहिब में माथा टेकने से लेकर जत्थेदार को स्पष्टीकरण देने तक की पूरी प्रक्रिया को मान ने बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न किया। अब पूरी संगत और प्रदेश की जनता की निगाहें अकाल तख्त साहिब से आने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हैं। भगवंत मान का यह कदम यह संदेश देता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वोच्च पद पर होने के बावजूद धार्मिक और नैतिक मूल्यों के प्रति उत्तरदायित्व सबसे ऊपर है। फिलहाल, अकाल तख्त साहिब के सचिवालय ने उनके स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड में ले लिया है और आगामी निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।
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