बठिंडा। भारतीय जनता पार्टी की सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ चल रहे मानहानि के मुकदमे में वीरवार को बठिंडा की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कंगना रनौत को इस मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट प्रदान कर दी है। यह पूरा मामला साल 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन के दौरान शुरू हुआ था, जब कंगना रनौत ने एक बुजुर्ग महिला महिंदर कौर के विरुद्ध सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी की थी। वीरवार को हुई इस सुनवाई के दौरान कंगना रनौत वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुईं।
सुनवाई के दौरान मुख्य मुद्दा कंगना रनौत द्वारा दायर की गई वह अर्जी थी, जिसमें उन्होंने अदालत से व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी। कंगना रनौत के वकील ने न्यायाधीश के सामने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि वे वर्तमान में एक सांसद हैं और उनके पास कई राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां हैं। उनकी व्यस्तताएं देश के अलग-अलग हिस्सों में रहती हैं, जिसके कारण हर सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से बठिंडा पहुंचना उनके लिए व्यावहारिक रूप से कठिन है। वकील ने यह भी आश्वासन दिया कि भले ही वे शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन वे तकनीक के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा अदालत की हर कार्यवाही में निरंतर हिस्सा लेती रहेंगी।
कंगना रनौत की इस अर्जी का शिकायतकर्ता महिंदर कौर के वकील रघुबीर सिंह बहिणीवाल ने पुरजोर विरोध किया। बहिणीवाल ने अदालत में तर्क दिया कि यह मामला पिछले चार वर्षों से लंबित है और कंगना रनौत जानबूझकर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से कतरा रही हैं। उन्होंने दलील दी कि रसूख या पद के आधार पर किसी को विशेष रियायत नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि इससे न्याय की प्रक्रिया धीमी होती है और पीड़ित पक्ष का संघर्ष बढ़ जाता है। महिंदर कौर के पक्ष ने अदालत से मांग की कि न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया जाए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की लंबी बहस और कानूनी बारीकियों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने कंगना रनौत की दलीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अब आगामी सुनवाइयों के दौरान कंगना रनौत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रख सकेंगी। इस मामले में अब तक कई गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य भी अदालत के रिकॉर्ड में शामिल किए गए हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह मामला किसान आंदोलन के समय का है। आरोप है कि कंगना रनौत ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्होंने बुजुर्ग किसान महिला महिंदर कौर के बारे में आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कही थीं। महिंदर कौर का कहना है कि इस टिप्पणी से न केवल उन्हें मानसिक पीड़ा हुई, बल्कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा को भी गहरा नुकसान पहुंचा है। इसी सामाजिक छवि को धूमिल करने के आधार पर उन्होंने कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई में गवाहों से संबंधित लंबित मुद्दों और केस की भावी कानूनी दिशा पर चर्चा की जाएगी। वहीं, महिंदर कौर ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वह न्याय के लिए अपनी इस कानूनी लड़ाई को अंतिम निर्णय आने तक जारी रखेंगी। कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब यह देखना होगा कि 27 जनवरी की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल, सांसद कंगना रनौत के लिए यह अदालती राहत काफी मायने रखती है।
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