देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम शासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाने में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह अभियान न केवल प्रशासन और नागरिकों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहा है, बल्कि जनसमस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण का सबसे विश्वसनीय माध्यम बनकर उभरा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार स्वयं चलकर जनता की चौखट तक पहुँच रही है, जिससे राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 14 जनवरी 2026 तक उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के तहत व्यापक स्तर पर शिविरों का आयोजन किया गया है। अब तक प्रदेशभर में कुल 328 कैंप लगाए जा चुके हैं, जिनमें दो नए कैंपों का आयोजन बुधवार को ही किया गया। इन शिविरों की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 2,54,137 नागरिकों ने इनमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। अकेले बुधवार के दिन ही 2,730 नागरिकों ने इन शिविरों में पहुँचकर अपनी बात रखी। यह भारी जनसहभागिता सरकार के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाती है।
शिकायतों और प्रार्थना पत्रों की प्राप्ति के मामले में भी यह अभियान काफी सक्रिय रहा है। अब तक इन विशेष शिविरों के माध्यम से कुल 26,814 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें से 26,722 पत्र पूर्व के दिनों में मिले थे, जबकि बुधवार को 92 नए प्रार्थना पत्र शासन को प्राप्त हुए। प्राप्त आवेदनों का वर्गीकरण करने पर पता चलता है कि इनमें से 18,166 मामले शिकायत श्रेणी के रहे हैं। बुधवार को भी 43 नई शिकायतें दर्ज की गईं, जिन पर प्रशासन ने त्वरित कार्यवाही शुरू कर दी है।
निस्तारण की स्थिति पर नजर डालें तो आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं। अब तक कुल 36,753 प्रार्थना पत्रों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है, जिनमें 71 प्रकरणों का समाधान केवल बुधवार के दिन ही सुनिश्चित किया गया। इसके अतिरिक्त, यह कार्यक्रम केवल शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाने का भी बड़ा जरिया बना है। विभिन्न जनपदों में अब तक 1,38,011 व्यक्तियों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं से सीधे तौर पर लाभान्वित किया गया है। बुधवार को भी 370 लाभार्थियों को इस सूची में जोड़ा गया।
जनपदवार उपलब्धियों की बात करें तो हरिद्वार इस अभियान में सबसे अग्रणी जिला बनकर उभरा है। हरिद्वार में सर्वाधिक 52,930 नागरिकों ने शिविरों में प्रतिभाग किया और यहाँ रिकॉर्ड 10,846 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। देहरादून में भी 35,893 नागरिकों की सहभागिता रही और 1,638 समस्याओं का समाधान हुआ। अल्मोड़ा में 31,741 लोगों की मौजूदगी के बीच 5,307 मामलों का निपटारा हुआ। उधम सिंह नगर में 25,193 लोगों की सहभागिता के साथ 3,624 मामले सुलझाए गए। उत्तरकाशी में 20,059 नागरिकों ने भाग लिया और 3,468 प्रकरण निस्तारित हुए। पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, बागेश्वर, चम्पावत, टिहरी, पौड़ी और रुद्रप्रयाग में भी हजारों नागरिकों को इस अभियान के जरिए राहत मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्तमान सरकार की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक अपनी समस्या के समाधान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर न हो। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए शासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुँच रहा है।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि लंबित शिकायतों के निस्तारण में और अधिक तेजी लाई जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल फाइलों का निपटारा ही काफी नहीं है, बल्कि समाधान की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि जनता को वास्तविक न्याय मिले। पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह विशेष अभियान भविष्य में भी प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य निरंतर करता रहेगा।
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