नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपनी ही सरकार द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर अब खुद ही गहरी चिंता में नजर आ रहे हैं। डोनल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों और उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ के अधिकारों को लेकर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई चल रही है। अदालत का फैसला अभी आना बाकी है, लेकिन ट्रंप की सोशल मीडिया पर सक्रियता यह संकेत दे रही है कि वे संभावित परिणाम को लेकर काफी घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी सरकार के पक्ष में नहीं आया, तो अमेरिका को ऐतिहासिक आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
सोमवार, 12 जनवरी को डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उनकी घबराहट साफ झलक रही थी। ट्रंप ने लिखा कि यदि सुप्रीम कोर्ट यह ऐतिहासिक फैसला सुनाता है कि अमेरिका को इतना अधिक टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है, तो देश की स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वे टैरिफ के मामले में अदालत की संभावित सख्ती से डरे हुए हैं और उन्हें अपनी आर्थिक नीतियों के विफल होने का अंदेशा सता रहा है।
डोनल्ड ट्रंप ने टैरिफ के कारण होने वाले व्यापक आर्थिक प्रभावों पर भी चिंता जताई। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि अदालत टैरिफ को अवैध घोषित करती है, तो अमेरिकी सरकार को वह सारा पैसा वापस करना होगा जो उसने अब तक विभिन्न देशों और कंपनियों से टैरिफ के रूप में वसूला है। ट्रंप के अनुसार, सरकार के लिए पहले से खर्च किए गए या वसूले गए इन अरबों-खरबों डॉलर को वापस करना एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा। उन्होंने इसे एक ‘व्यापक गड़बड़ी’ करार देते हुए कहा कि इसकी कुल लागत सैकड़ों अरब डॉलर से लेकर खरबों डॉलर तक जा सकती है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोनल्ड ट्रंप इस तरह के बयानों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से अदालत पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। उनके एकतरफा टैरिफ लगाने के अधिकारों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अभी गहन विचार कर रहा है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में यह स्वीकार किया कि संभव है फैसला उनके पक्ष में न आए। उन्होंने लिखा कि अगर ऐसा हुआ तो यह इतनी बड़ी धनराशि होगी कि सरकार के लिए यह पता लगाना भी मुश्किल हो जाएगा कि किस देश या कंपनी को, कब और कितना भुगतान करना है। उनके अनुसार इस हिसाब-किताब को सुलझाने में ही कई साल लग सकते हैं।
डोनल्ड ट्रंप ने इस वित्तीय संकट से बचने के लिए एक नया और अजीबोगरीब तर्क भी पेश किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि अमेरिका को इतनी बड़ी राशि अन्य देशों को चुकानी पड़ती है, तो वह नकद भुगतान के बजाय निवेश के माध्यम से किया जाना चाहिए। ट्रंप ने लिखा कि वास्तव में जो राशि चुकानी होगी वह कई सौ अरब डॉलर होगी, जिसे अन्य देशों को नकद लेकर नहीं, बल्कि अमेरिका में निवेश करके, वहां प्लांट लगाकर या नई फैक्ट्रियां खोलकर वसूलना चाहिए। ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि वे किसी भी स्थिति में भारी नकद वापसी से बचना चाहते हैं और इसके लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहे हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो ट्रंप की आर्थिक साख और अमेरिका की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को तय करेगा।
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