नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा अवैध अप्रवासियों के खिलाफ शुरू की गई राष्ट्रव्यापी मुहिम ने अब एक हिंसक और विवादित मोड़ ले लिया है। ट्रंप के आदेश पर उनके एजेंट पूरे अमेरिका में रहने वाले लोगों की नागरिकता और दस्तावेजों की वैधता की गहन जांच कर रहे हैं। इसी अभियान के बीच मिनियापोलिस से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट’ (आइस) के एक एजेंट ने एक अमेरिकी महिला पर सरेआम गोलियां चला दीं। इस हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त है।
यह पूरी घटना दक्षिण मिनियापोलिस की है, जहां सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई ने आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका की पहचान 37 वर्षीय रेनी निकोल गुड के रूप में हुई है। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन के दावों को संदिग्ध बना दिया है। वीडियो साक्ष्यों के अनुसार, आइस के तीन एजेंट एक कार को चारों तरफ से घेरे हुए नजर आ रहे हैं। वे कार का दरवाजा खोलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन तभी कार के अंदर बैठी रेनी निकोल गुड ने अपनी गाड़ी को आगे बढ़ाने की कोशिश की। महिला द्वारा कार की रफ्तार बढ़ाते ही वहां मौजूद एक एजेंट ने कार पर लगातार तीन गोलियां दाग दीं। इनमें से एक गोली सीधे रेनी के सिर में जा लगी और उनकी तत्काल मृत्यु हो गई।
इस सनसनीखेज घटना के बाद डोनल्ड ट्रंप और आइस के अधिकारियों ने एजेंट की इस कार्रवाई का बचाव किया है। सरकार और सुरक्षा एजेंसी की ओर से जारी सफाई में इस गोलीबारी को ‘आत्मरक्षा’ (सेल्फ डिफेंस) करार दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि महिला ने कार से एजेंटों को कुचलने की कोशिश की थी, जिससे उनकी जान को खतरा पैदा हो गया था। खुद को बचाने के लिए एजेंट के पास गोली चलाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। फॉक्स 9 को दिए एक आधिकारिक बयान में आइस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महिला ने जानबूझकर एजेंट को मारने का प्रयास किया था, जिसके कारण मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा।
हालांकि, मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने सरकारी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। मेयर जैकब फ्रे ने वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि जो कुछ भी अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है। मेयर के अनुसार, वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि महिला की ओर से एजेंटों की जान को ऐसा कोई खतरा नहीं था जैसा कि दावा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आइस अपनी गलती और हिंसक कार्रवाई को छुपाने के लिए एक झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है।
इस घटना ने अमेरिका के भीतर ट्रंप प्रशासन की प्रवासी नीतियों और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली के विरुद्ध जन आक्रोश को भड़का दिया है। स्थानीय नागरिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि अवैध अप्रवासियों को पकड़ने के नाम पर जिस तरह से सुरक्षा बल आम अमेरिकी नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। रेनी निकोल गुड की मौत ने अब ट्रंप के इस अभियान को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।
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