नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर एक अत्यंत सख्त और बड़ा आर्थिक आदेश जारी किया है। बुधवार, 7 जनवरी को जारी किए गए इस निर्देश के माध्यम से ट्रंप ने वेनेजुएला की भावी अर्थव्यवस्था और उसके व्यापारिक संबंधों की दिशा तय कर दी है। इस आदेश के तहत अब वेनेजुएला को तेल के नए सौदों से प्राप्त होने वाली समस्त धनराशि को अनिवार्य रूप से अमेरिकी उत्पादों की खरीद पर ही खर्च करना होगा। डोनल्ड ट्रंप का यह फैसला वेनेजुएला की वित्तीय स्वायत्तता पर अमेरिका के पूर्ण नियंत्रण के रूप में देखा जा रहा है।
डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ के माध्यम से इस नीति की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेनेजुएला के लोग अब भविष्य में होने वाली तेल की डील्स से जो भी पैसा कमाएंगे, उसका उपयोग वे केवल और केवल अमेरिका में निर्मित सामान खरीदने के लिए ही कर सकेंगे। ट्रंप के इस फरमान का सीधा अर्थ यह है कि वेनेजुएला की तेल संपदा से होने वाली आय अब वापस अमेरिकी बाजार में ही आएगी, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन वस्तुओं की सूची का भी उल्लेख किया है जिन्हें वेनेजुएला को अनिवार्य रूप से अमेरिका से ही आयात करना होगा। इसमें अमेरिका के उन्नत कृषि उत्पाद, जीवन रक्षक दवाइयां और अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद शामिल हैं। इतना ही नहीं, डोनल्ड ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला के इलेक्ट्रिक ग्रिड को सुधारने और बेहतर बनाने के लिए जिन तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता होगी, वे भी केवल अमेरिका से ही खरीदे जाएंगे। इस आदेश के माध्यम से अमेरिका ने वेनेजुएला की बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्वास्थ्य और भोजन तक की आपूर्ति पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की योजना बनाई है।
डोनल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वेनेजुएला को अब मुख्य रूप से यूनाइटेड स्टेट्स को ही अपना सबसे प्रमुख और अनिवार्य बिजनेस पार्टनर समझना होगा। उनके अनुसार, वेनेजुएला के लिए यही सबसे समझदारी भरा निर्णय है। ट्रंप का मानना है कि यह व्यवस्था वेनेजुएला के नागरिकों और अमेरिका के लोगों, दोनों के लिए ही बेहतर साबित होगी। इस आदेश के बाद अब वेनेजुएला किसी अन्य देश के साथ स्वतंत्र व्यापारिक संबंध बनाने की स्थिति में नहीं रहेगा।
यह महत्वपूर्ण आर्थिक घोषणा उस समय की गई है जब वेनेजुएला में राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। हाल ही में अमेरिकी सेना ने एक बेहद आक्रामक और नाटकीय कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके ही निवास स्थान से गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, 2 और 3 जनवरी की दरमियानी रात को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर एक के बाद एक कई भीषण विस्फोटक हमले किए थे।
हमलों के बाद, रात के करीब 2 बजे अमेरिकी सैनिक निकोलस मादुरो के घर में दाखिल हुए और उन्हें हिरासत में ले लिया। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान मादुरो के साथ उनकी पत्नी सिलियो फोर्स को भी गिरफ्तार किया गया। अमेरिकी सेना इन दोनों को कैदी बनाकर अपने साथ अमेरिका ले गई है। राष्ट्रपति की गिरफ्तारी और अब तेल सौदों पर ट्रंप के इस नए आदेश ने वेनेजुएला की पूरी व्यवस्था को अमेरिका के अधीन लाकर खड़ा कर दिया है। ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का एक और कड़ा उदाहरण पेश करता है।
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