शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से इसके प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं। सरकार ने विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देते हुए इससे संबंधित अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी है। इस पुनर्गठन के तहत विभाग में लंबे समय से चले आ रहे पांच पुराने पदों को समाप्त कर दिया गया है और उनकी जगह पर पांच नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।
पुनर्गठन की इस प्रक्रिया के साथ-साथ सरकार ने राज्य जैव विविधता बोर्ड का भी नए सिरे से गठन किया है। इस बोर्ड की कमान मुख्य सचिव को सौंपी गई है, जो इसकी अध्यक्षता करेंगे। बोर्ड के ढांचे में पहले की तरह ही विभिन्न संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन में अंतर-विभागीय समन्वय बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से जैव विविधता बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और गति आएगी।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि विभाग के पुनर्गठन का मुख्य कारण कार्य की बदलती जरूरतें और विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ती चुनौतियां हैं। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसी तकनीकी मजबूती और विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए पदों का नए सिरे से वर्गीकरण या ‘पुनर्संयोजन’ किया गया है। नए सृजित किए गए सभी पद पे मैट्रिक्स लेवल-11 (38,500 रुपये से 1,22,700 रुपये) के तहत रखे गए हैं। सरकार ने इन नए पदों को तुरंत प्रभाव से भरने के आदेश भी जारी कर दिए हैं ताकि विभाग के कामकाज में कोई बाधा न आए।
विभाग के पुराने ढांचे में से जिन पांच पदों को समाप्त किया गया है, उनमें प्रधान विज्ञानी अधिकारी बायोटेक्नोलॉजी (डाइंग कैडर), वरिष्ठ विज्ञानी अधिकारी योजना, परियोजना अधिकारी और रिसर्च असिस्टेंट के दो पद शामिल हैं। इन पदों को वर्तमान प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से अब उपयोगी नहीं माना गया, जिसके चलते इन्हें खत्म करने का फैसला लिया गया।
इन पदों के बदले में जिन पांच नए पदों का सृजन किया गया है, वे सीधे तौर पर आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों और तकनीकी समाधानों से जुड़े हैं। नए स्वीकृत पदों में कनिष्ठ विज्ञानी अधिकारी बायोटेक्नोलॉजी का एक पद, कनिष्ठ विज्ञानी अधिकारी जलवायु परिवर्तन के दो पद और कनिष्ठ पर्यावरण अधिकारी के दो पद शामिल किए गए हैं। विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के लिए दो समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति यह दर्शाती है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर अधिक गंभीरता से ध्यान देना चाहती है।
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की निगरानी अत्यंत आवश्यक है। सरकार को उम्मीद है कि इस पुनर्गठन और नए तकनीकी पदों के सृजन से विभाग जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम देने में सक्षम होगा। नए पदों पर होने वाली नियुक्तियों से विभाग को वैज्ञानिक शोध और पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में नई ऊर्जा मिलेगी। राज्य सरकार की इस पहल को विभाग की तकनीकी रीढ़ को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।