Uttarakhand: जन जन की सरकार अभियान के तहत एक लाख चौवालीस हजार लोगों को मिला लाभ और तेरह हजार शिकायतों का हुआ समाधान

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहा जन जन की सरकार जन जन के द्वार अभियान सुशासन का एक नया अध्याय लिख रहा है। 3 जनवरी 2026 की दैनिक प्रगति रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि सरकार अब केवल कागजों पर नहीं बल्कि धरातल पर काम कर रही है। प्रदेश के 13 जिलों में आयोजित 216 जनसेवा कैंपों में अब तक 1 लाख 44 हजार 134 से अधिक नागरिकों ने हिस्सा लिया है। केवल आज के दिन ही 12 कैंपों में 8940 लोगों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम की सफलता पर मुहर लगा दी है।

इस अभियान के दौरान अब तक कुल 18 हजार 360 शिकायतें और प्रार्थना पत्र मिले हैं जिनमें से 13 हजार 068 मामलों का मौके पर ही या त्वरित कार्रवाई के जरिए निपटारा कर दिया गया है। आज के दिन भी 613 शिकायतें मिलीं जिनमें से 292 का तुरंत समाधान हुआ। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन अब समाधान केंद्रित और जवाबदेह बन चुका है। जो मामले लंबित हैं उनकी भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

प्रमाण पत्रों के लिए भी लोगों को अब भटकना नहीं पड़ रहा है। आय, जाति, निवास और अन्य प्रमाण पत्रों के लिए अब तक कुल 24 हजार 081 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें 1808 आवेदन आज ही दर्ज किए गए। इससे आम नागरिकों खासकर गरीब और दूरदराज के लोगों को बड़ी राहत मिली है। इसके अलावा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी 80 हजार 712 नागरिकों को मिल चुका है जिसमें आज के 3509 लाभार्थी भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने इस अभियान को शासन की सोच बदलने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें बल्कि प्रशासन खुद उनके बीच जाकर समाधान करे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर शिकायत का प्राथमिक स्तर पर ही निपटारा हो और सक्षम अधिकारी कैंपों में मौजूद रहें। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस अभियान से न केवल जनता का विश्वास मजबूत हुआ है बल्कि बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगी है। यह कार्यक्रम अब उत्तराखंड में सुशासन की नई पहचान बन चुका है।

 

Pls read:Uttarakhand: उत्तरांचल प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी ने की सूचना महानिदेशक से मुलाकात और भवन निर्माण पर हुई चर्चा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *