देहरादून। उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की शिकायतों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई जिसमें प्रदेशव्यापी जांच के सख्त निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि सरकारी अभिलेखों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में मौजूद परिवार और कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियों को तुरंत संबंधित जिलाधिकारियों के पास सुरक्षित रखवाया जाए ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश न बचे। इन रजिस्टरों की गहन जांच सीडीओ और एडीएम स्तर के अधिकारियों से कराने का फैसला लिया गया है। जांच का दायरा काफी व्यापक रखा गया है जो वर्ष 2003 से लेकर अब तक का होगा ताकि पुरानी गड़बड़ियों का भी पर्दाफाश हो सके।
बैठक में यह बात सामने आई कि राज्य की सीमा से लगे मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसी को देखते हुए सरकार ने जांच के साथ साथ नियमों को सख्त बनाने का भी मन बना लिया है। पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2 लाख 66 हजार से ज्यादा आवेदन आए थे जिनमें से 5429 आवेदनों को निरस्त किया गया था। निरस्त आवेदनों की यह संख्या फर्जी प्रविष्टियों की ओर इशारा करती है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों समेत पूरे प्रदेश में समान रूप से जांच की जाए। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार कर कैबिनेट में लाने का भी निर्णय लिया गया है। बैठक में गृह सचिव शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।