नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के रिश्तों को एक नई मजबूती मिली है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाकात की और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम रक्षा समझौतों पर मुहर लगी। सबसे बड़ा फैसला इजरायल की हवाई ताकत को बढ़ाने को लेकर हुआ है। पेंटागन ने सोमवार को घोषणा की है कि बोइंग कंपनी को एफ 15 फाइटर जेट इजरायल प्रोग्राम के लिए 8.6 बिलियन डॉलर का विशाल कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है।
पेंटागन की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि बोइंग को इजरायली वायु सेना के लिए 25 नए एफ 15 आईए विमानों को डिजाइन करने, उनका निर्माण करने और उन्हें इजरायल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत 8.58 बिलियन डॉलर तक हो सकती है। खास बात यह है कि इस सौदे में भविष्य में 25 और अतिरिक्त विमानों को शामिल करने का विकल्प भी रखा गया है। यह समझौता इजरायल की वायु सेना को और अधिक आधुनिक और घातक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से अपने सबसे करीबी मध्य पूर्वी सहयोगी इजरायल को हथियारों की आपूर्ति करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश रहा है। हालांकि गाजा में चल रहे संघर्ष और इजरायल के हमलों को लेकर अमेरिका के भीतर ही विरोध के स्वर उठ रहे हैं। फिलिस्तीन समर्थक और युद्ध विरोधी प्रदर्शनकारियों ने वाशिंगटन से मांग की थी कि इजरायल को दिया जा रहा सैन्य समर्थन बंद किया जाए। लेकिन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन दोनों के ही प्रशासन ने इन मांगों को दरकिनार करते हुए इजरायल का साथ देना जारी रखा है।
पेंटागन ने बताया कि इस भारी भरकम कॉन्ट्रैक्ट का काम सेंट लुइस में किया जाएगा। योजना के मुताबिक इस पूरे प्रोजेक्ट के 31 दिसंबर 2035 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। नेतन्याहू और ट्रंप की इस मुलाकात और रक्षा सौदे ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका इजरायल की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है