शुक्रवार का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद उत्साहजनक समाचार लेकर आया है। देश की आर्थिक गतिविधियों ने एक बार फिर से अपनी मजबूती साबित कर दी है। सरकार द्वारा जारी किए गए नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की विकास दर उम्मीद से कहीं अधिक बेहतर प्रदर्शन कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक 30 सितंबर 2025 को समाप्त हुई चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी 8.2 प्रतिशत की शानदार दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय बाजार के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की मजबूत होती आर्थिक स्थिति का परिचायक है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने 28 नवंबर को इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। जारी किए गए बयान में एनएसओ ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी या स्थिर मूल्यों पर जीडीपी के 48.63 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। अगर हम इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष से करें तो यह वृद्धि स्पष्ट दिखाई देती है। वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में यह आंकड़ा 44.94 लाख करोड़ रुपये था। इन दोनों आंकड़ों की तुलना करने पर 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था में आई तेजी को दर्शाती है।
यह वृद्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसने बाजार के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों के सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। बाजार में इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है। तमाम विश्लेषकों का मानना था कि विकास दर इसी दायरे में रहेगी, लेकिन 8.2 प्रतिशत के आंकड़े ने सभी भविष्यवाणियों को गलत साबित करते हुए एक सुखद आश्चर्य दिया है।
अर्थव्यवस्था के इस प्रदर्शन को समझने के लिए हमें पिछले कुछ समय के आंकड़ों पर भी नजर डालनी होगी। भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक लंबा सफर तय किया है और निचले स्तर से उबरकर यह तेजी हासिल की है। आंकड़ों पर गौर करें तो सितंबर 2024 की तिमाही (वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही) में अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई थी और यह महज 5.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। वह दौर काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वह वृद्धि दर पिछली सात तिमाहियों में सबसे कम थी। हालांकि, उसके बाद से अर्थव्यवस्था ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सुधार का यह सिलसिला पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही से ही शुरू हो गया था, जब विकास दर 7.8 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। अब दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 7.8 प्रतिशत से बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गया है, जो यह दर्शाता है कि आर्थिक गतिविधियों में निरंतर तेजी आ रही है और मांग में सुधार हो रहा है। 5.6 प्रतिशत के निचले स्तर से उठकर पहले 7.8 प्रतिशत और अब 8.2 प्रतिशत पर पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था की वी-शेप रिकवरी या निरंतर मजबूती का संकेत है।
कुल मिलाकर शुक्रवार को जारी ये आंकड़े बताते हैं कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। 44.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 48.63 लाख करोड़ रुपये का सफर तय करना यह साबित करता है कि उत्पादन और सेवाओं के क्षेत्र में काम काज बेहतर हुआ है। विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन करना निवेशकों के भरोसे को भी बढ़ाता है।
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